deltin33 • 2025-10-29 20:37:05 • views 1003
प्रकाश वत्स, पूर्णिया। जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर लखीजान नदी का गोसाईघाट क्षेत्र के पारसमणि, बेला पंचावती व चिकनी डुमरिया पंचायत के मुहाने पर स्थित है। यह नदी अब मैली हो चुकी है, लेकिन कभी यह अपना स्वच्छ पानी पिला जिंदगी भी बांटती थी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
नदियों के किनारे की बस्ती धनी मानी जाती थी। पेयजल के साधन सीमित थे। उस दौर में इस नदी के प्रति बड़ी आबादी कृतज्ञ रहती थी। इस घाट पर छठ का रंग भी अनोखा है। नदी का विद्रूप होता तट अब श्मशान को भी अपने आगोश में ले लेती है।
इस घाट पर व्रतियों की भीड़ ऐसी होती है कि लोगों के लिए अब दलदली का पर्याय बनता जा रहा नदी का तल में उतरना भी मुश्किल होता है। जगह-जगह अलग-अलग टोली जमी थी। किसी को अर्घ्य दे देने का सुकून था तो कोई लेट न हो जाए... वाली बेचैनी में थे।
चुनाव नजदीक होने के कारण इन टोलियों में जुबानी जंग भी चल रही थी। इसमें आसमान का शोर भी था। कुछ दिल की अपनी कसक थी। नदी की धारा भले ही कुंद थी लेकिन चुनावी धारा तेज चल रही थी।
एक टोली में मौजूद पूर्व मुखिया अजीत कुमार झा का कहना था कि यह इलाका काफी पिछड़ा हुआ था। अब सड़कों का जाल बिछा है। आसमान में हवाई जहाज का शोर बढ़ा है। लोग जरुरत पड़ने पर दो घंटे में दिल्ली से आ जाएंगे या चले जाएंगे।
शिक्षा के प्रति जागरुकता बढ़ी है। यह चुनाव का पैमाना भी होना चाहिए। टोली में मौजूद गंगा की धारा अलग थी। उनका कहना था कि अभी हम मतदाताओं की कमी से लोकतंत्र वास्तविक सुंदरता नहीं ले पा रही है।
जाति व धर्म के नाम पर राजनीतिक पार्टियां टिकट बांटती है। यह निश्चित रुप से इस बात का सबूत है कि जमीन की कमजोरी भांप आसमान से विभिन्न पार्टियां अपना जाल फेंकती है।
धमदाहा के साथ पटना व दिल्ली के घटनाक्रम पर भी नजर
यह घाट धमदाहा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पड़ता है। इस घाट पर सरकारी जमीन नहीं है। जो जमीन है, उसमें पंचायत की योजना से सीढ़ी घाट का निर्माण हुआ है। जिला परिषद की योजना से एक शवदाह गृह का निर्माण कराया गया है। बड़ी योजना की गुंजाइस बनना फिलहाल मुश्किल है।
वैसे तट पर मौजूद सूर्य मंदिर इसकी खूबसूरती में अब भी चार चांद लगा रहा है। घाट तक आने के लिए चमचमाती सड़क भी है। टोली में मौजूद सुनील कुमार झा की नजर इस विधानसभा की चुनावी गतिविधि के साथ-साथ पटना व दिल्ली के घटनाक्रम पर भी टिकी रहती है। वे पटना की हलचल पर भी चर्चा करते हैं।
पैक्स अध्यक्ष अमित कुमार झा ने कहा कि चुनावी जंग की धारा को इंटरनेट मीडिया ने अलग ही रुप दे दिया है। वार-प्रतिकार का वह दौर भी अलग है।
अजीत कुमार, सुशील कुमार, मनोज कुमार व पिंकू को विश्वास है कि सीमांचल का चुनाव परिणाम पूर्व की भांति सद संदेश वाला होगा। कहीं लोग गंभीरता से प्रत्याशियों की बात सुन रहे हैं तो कई जगह विरोध भी हो रहा है। |
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