तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बिजली निगम के अभियंता ही राजस्व को क्षति पहुंचाने में संलिप्त हैं। चौरी चौरा खंड के सरदारनगर उपकेंद्र के अवर अभियंता सुनील कुमार ने बिना रुपये जमा कराए निजी कालोनी में बने सात घरों को कनेक्शन दे दिया। कनेक्शन पर मीटर लगा तो गड़बड़झाले का पर्दाफाश हुआ। इसके बाद बुधवार को जेई सुनील कुमार और लाइनमैन रामप्रीत को निलंबित कर दिया गया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
जेई सुनील कुमार को विद्युत वितरण मंडल प्रथम के अधीक्षण अभियंता डीके सिंह और लाइनमैन रामप्रीत को चौरी चौरा खंड के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार ने निलंबित किया है। दोनों को परीक्षण खंड से संबद्ध किया गया है। सूत्रों का कहना है कि प्राइवेट कालोनाइजर को विद्युतीकरण पर नियमानुसार तकरीबन 30 लाख रुपये का खर्च बताया गया था।
इसके बाद बिना रुपये जमा कराए ऊपर से पांच लाख रुपये लेकर कालोनी में बने घरों को कनेक्शन दे दिया गया। मई में ही लाइन जोड़ दी गई थी। दो दिन पहले मीटर लगाया गया तो मामले का पर्दाफाश हुआ। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शंभू कुमार ने मामले में विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। सरदारनगर के रामपुर बुजुर्ग क्षेत्र अंतर्गत ग्रीन सिटी कालोनी का निर्माण हुआ है।
इस कालोनी में सात लोग मकान बनवाकर रह रहे हैं। लोग रहने के लिए आए तो उन्होंने कालोनाइजर पर बिजली कनेक्शन देने का दबाव बनाया। कालोनाइजर ने भूखंड बेचते समय बिजली की व्यवस्था का आश्वासन दिया था।
कालोनाइजर ने बिजली निगम के अभियंताओं से संपर्क किया तो उन्होंने 70 रुपये प्रति वर्गफीट की दर पर पूरे भूखंड के रुपये जमा करने को कहा गया। साथ ही विकल्प के रूप में बताया गया कि यदि सिर्फ सात कनेक्शन ही लेने हैं तो इन उपभोक्ताओं के भूखंड के क्षेत्रफल के आधार पर प्रति वर्गफीट 70 रुपये जमा करा दें। बाद में जो लोग आएंगे उनको भी इसी नियम के तहत कनेक्शन दिया जाएगा।
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कालोनाइजर ने हिसाब लगाया तो पूरी कालोनी में विद्युतीकरण पर तकरीबन 30 लाख रुपये खर्च हो रहे थे। कुछ बिजलीकर्मियों ने ही रास्ता दिखाया। इलाके के एक पेटी कांट्रेक्टर ने मध्यस्थता कराई और खुद ही पोल गाड़ दिया। बताया जा रहा है कि जेई ने कालोनी के बाहर तक बिजली की लाइन पहुंचा दी। इसके बाद मौका देखकर घरों से लाइन जोड़ दी गई। फायदा पहुंचाने के लिए तत्काल कनेक्शन नहीं दिया गया। लाइन बनाने के लिए पांच पोल लगाए गए।
तबादले के बीच हुआ खेल
सूत्रों का कहना है कि सरदारनगर उपकेंद्र में मई में तबादले के दौरान खेल हुआ है। पहले तैनात जेई ने पूरा मामला फाइनल किया और तबादला आदेश के बाद चार्ज छोड़ने और नई जेई ने चार्ज लेने के बीच पूरी लाइन बनवा दी। इस मामले की भी जांच की जा रही है।
जंगल रामलखना में बनी लाइन मामले में अब तक कार्रवाई नहीं
चौरी चौरा खंड के जंगल रामलखना में 11 हजार वोल्ट की पांच पोल की लाइन को खेत से निकालकर दूसरी जगह शिफ्ट करने में अब तक कार्रवाई नहीं की गई है। चौरी चौरा खंड के पेटी कांट्रैक्टर ने ही इस लाइन को भी शिफ्ट किया था। महीनों बाद भी अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। |
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