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Mumbai Hostage Case: रोहित आर्या की पत्नी ने खाई थी ये कसम, कहां-किससे हुई चूक; अब खुला पूरा राज

cy520520 2025-10-31 03:07:25 views 628
  

रोहित आर्य मामलें में नया खुलासा।  



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रोहित आर्य के पुलिस की गोली से मारे जाने के बाद उसका एक पुराना विवाद पूर्व शिक्षामंत्री दीपक केसरकर से सामने आ रहा है। केसरकर ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि रोहित ने उनके शिक्षामंत्री रहते ‘स्वच्छ मॉनीटर’ नामक एक परियोजना में काम किया था। इस परियोजना के तहत उन्होंने ‘लेट्स चेंज’ नामक एक फिल्म बनाई थी। यदि वह निर्धारित प्रक्रिया पूरी करते तो उन्हें उसका भुगतान मिल सकता था। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

केसरकर पूर्व की एकनाथ शिंदे सरकार में शिक्षा मंत्री थे। उनके साथ रोहित आर्या की एक तस्वीर भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि रोहित आर्या ने उनके कार्यकाल में ही शिक्षा विभाग से जुड़ा एक प्रोजेक्ट किया था, जिसका करीब दो करोड़ रुपयों का भुगतान उन्हें नहीं हुआ था।

प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद जब शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव ने यह बयान दिया कि प्रोजेक्ट में कुछ कमियां रह गई हैं, तो रोहित को लगा कि उसे फंसाने की योजना बनाई जा रही है। तब उन्होंने पिछले वर्ष पुणे में एक महीने तक धरना भी दिया था। उनका कहना था कि उन्हें न तो उनके काम का पैसा मिला, ना ही उसका क्रेडिट मिला।

जबकि पुलिस की गोली से रोहित की मौत के बाद दीपक केसरकर ने एक बयान में कहा है कि उन्होंने रोहित को अपनी ओर से कुछ भुगतान चेक के माध्यम से किया था। लेकिन सरकारी भुगतान की एक प्रक्रिया होती है। यदि उन्होंने वह प्रक्रिया पूरी की होती, तो उनका भुगतान जरूर हुआ होता।
दिमागी रूप से बीमार नहीं थे रोहित- केसरकर

रोहित आर्य को दिमागी रूप से बीमार बताए जाने का दीपक केसरकर ने खंडन किया है। लेकिन उन्होंने कहा कि कोई सरकारी भुगतान न मिलने पर बच्चों को बंधक बनाना गलत था। पिछले वर्ष अगस्त में रोहित की पत्नी अंजली ने भी आरोप लगाया था कि सरकार उनके पति के दो करोड़ रुपयों का भुगतान नहीं कर रही है। उसने तब धमकी दी थी कि यदि उनके पति को कुछ हुआ तो वह किसी को छोड़ेंगी नहीं।
घटनास्थल से चंद कदम दूर है एनएसजी का कमांडो सेंटर

जिस आर.ए.स्टूडियो में आज करीब ढाई घंटे बच्चों को बंधक बनाने का ड्रामा चला उस स्टूडियो से मुश्किल से 300 मीटर की दूरी पर वह एन.एस.जी कमांडो सेंटर है, जिसकी स्थापना मुंबई में 26/11 के हमले के बाद हुई थी। चूंकि 26/11 के हमले के दौरान दिल्ली के निकट मानेसर से एन.एस.जी कमांडोज को मुंबई पहुंचने में घंटो लग गए थे, इसलिए उसके बाद देश में मानेसर के अलावा भी कुछ स्थानों पर एन.एस.जी जैसी प्रशिक्षित कमांडो फोर्स रखने की व्यवस्था की गई थी।

मुंबई में यह कमांडो सेंटर जोगेश्वरी विक्रोली लिंक रोड (जेवीएलआर) पर स्थित है। बच्चों को बंधक बनाए जाने की स्थिति में पुलिस चाहती तो वहां से प्रशिक्षत कमांडोज की मदद भी ली जा सकती थी। लेकिन पुलिस ने स्वयं अंदर घुसकर रोहित को पकड़ने की पहल की, जिसमें वह मारा गया।
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