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विश्‍व प्रसिद्ध फूलों की घाटी सर्दियों के लिए बंद, इस साल 15924 पर्यटकों ने किया दीदार

Chikheang 2025-11-1 00:07:19 views 1242
  

विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी शीतकाल में पर्यटकों के लिए बंद। आर्काइव



संवाद सहयोगी,जागरण गोपेश्वर । विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी शीतकाल में पर्यटकों के लिए बंद कर दी गई है। इस बार कुल 15924 भारतीय व विदेशी पर्यटकों ने घाटी का दीदार किया है। जिसमें 416 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। यह अब तक की विदेशी पर्यटकों की सर्वाधिक संख्या है। पार्क प्रशासन को 3328050 लाख की आय अर्जित हुई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

चमोली जिले के ज्योतिर्मठ विकासखंड में स्थित फूलों की घाटी एक जून को को पर्यटकों के लिए खुलती है। जबकि 31 अक्टूबर को शीतकाल के लिए पर्यटकों के लिए बंद हो जाती है। इस वर्ष फूलों की घाटी में 15508 भारतीय व 416 विदेशी पर्यटक आए हैं। हालांकि भारतीय पर्यटकों के मामले में इस वर्ष पिछले साल के सापेक्ष कमी दर्ज की गई है। फूलों की घाटी में सर्वाधिक वर्ष 2022 में 20830 पर्यटक आए थे जिसमें विदेशी पर्यटकों की संख्या 280 थी । 2023 में कुल 13161 पर्यटक आए जिमसें 401 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। जबकि 2024 में 19401 पर्यटकों ने फूलों की घाटी का दीदार किया जिसमें 330 विदेशी पर्यटक शामिल थे।

विदेशी पर्यटकों के मामले में इस बार सर्वाधिक संख्या 416 दर्ज की गई है। यह अब तक फूलों की घाटी में पहुंचने वाले विदेशी पर्यटकों की सर्वाधिक संख्या है। फूलों की घाटी को पर्यटकों के लिए बंद करने के उत्सव को यादगार बनाने के लिए अंतिम दिन वन विभाग के साथ स्थानीय कारोबारियों नागरिकों ने फूलों की घाटी का भ्रमण किया इस दौरान घाटी में कूड़े कचरे को भी वापस लाया गया। फूलों की घाटी से लौटने के बाद राष्ट्रीय पार्क प्रशासन ने घांघरिया स्थित मुख्य द्वार को बंद कर फूलों की घाटी पर शीतकाल के लिए प्रवेश को बंद कर दिया गया है। गौरतलब है कि हेमकुंड साहिब व लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट पहले ही 10 अक्टूबर को बंद हो चुके थे।

अब फूलों की घाटी भी पर्यटकों के लिए बंद होने के बाद भ्यूंडार घाटी में सन्नाटा पसर गया है। यहां पर होटल ढाबा ,घोडे खच्चर ,डंडी कंडी संचालक भी वापस लौट आए हैं। हेमकुंड साहिब लोकपाल लक्ष्मण मंदिर व फूलों की घाटी में पर्यटकों , तीर्थयात्रियों को रात्रि विश्राम की अनुमति नहीं है। लिहाजा इनका बेस कैंप घांघरिया ही है। शीतकाल में पूरा क्षेत्र बर्फ से ढक जाता है। इस क्षेत्र में आम लोगों की प्रवेश की अनुमति नहीं है। सिर्फ वन विभाग के कर्मी ही गश्त पर समय समय पर यहां आते हैं। कस्तूरा मृग सहित दुलर्भ जीव जंतुओं का प्राकृतिक आवास होने के चलते यह क्षेत्र संवेदनशील भी है। ऐसे में वन विभाग की गश्त शीतकाल में बढाई जाती है। भ्यूंडार के स्थानीय लोग भी अब शीतकालीन प्रवास गोविंदघाट के पास पुलना गांव लौट आए हैं।


उपप्रभागीय वनाधिकारी सुमन ने कहा कि फूलों की घाटी शीतकाल के लिए पर्यटकों के लिए बंद कर दी गई है। इस बार सर्वाधिक विदेशी पर्यटक घाटी में पहुंचे है। कहा कि शीतकाल में इस क्षेत्र में पर्यटकों का प्रवेश प्रतिबंधित होने के साथ वन कर्मियों की गश्त जारी रहेगी।

ये है खास

फूलों की घाटी 87.5 वर्ग किमी में फैली फूलों की घाटी में पांच सौ से अधिक प्रजाति के फूल अलग अलग समय पर खिलते हैं अलग अलग प्रजाति के फूल खिलने से घाटी का रंग , नीला,पीला,लाल, बैंगनी सहित अन्य रंगों में रंग जाता है। फूलों की घाटी एक जून को खुलकर 31 अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है। घाटी में अलग अलग प्रजाति के फूल अलग अलग समय में खिलने से पर्यटकों का आर्कषण बना रहता है।

फूलों की घाटी की खोज बि्रटिश पर्वताराही फे्रंच स्मिथ ने 1931 में की थी। बताया गया कि वे कामेट आरोहण से लौटते समय रास्ता भूल कर फूलों की घाटी पहुंच गए थे। फूलाें की घाटी से रुबरु होते हुए फ्रंेच स्मिथ ने वैली आफ फ्लवार नामक पुस्तक लिखी तब देश दुनिया को इस घाटी का पता चला। फूलों की घाटी के महत्व को देखते हुए 1982 में राष्ट्रीय पार्क व 2005 में यूनिस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा दिया।

घाटी में भोजपत्र का जंगल भी है। फूलों की घाटी पहुंचने के लिए ऋषिकेश से बदरीनाथ हाइवे पर सफर तय कर ज्योतिर्मठ से आगे गाेविंदघाट पहुंचना पडता है। यहां से 14 किमी की पैदल यात्रा कर घांघरिया पहुंचा जा सकता है।
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