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अब ATM से कैश के बजाय निकलेगा अनाज, अंगूठा लगाकर मिलेगा राशन; कहां-कहां लगेगी ये खास मशीन?

LHC0088 3 hour(s) ago views 929
  

अब एटीएम से निकलेगा अनाज



नई दिल्ली। आप अकसर एटीएम का यूज कैश निकालने के लिए करते होंगे। मगर क्या हो कि एटीएम से कैश के बजाय अनाज निकलने लगे? सुनने में थोड़ा अजीब है, मगर ये होने जा रहा है। राजस्थान के जयपुर, भरतपुर और बीकानेर जिलों में \“अनाज एटीएम\“ (Anaj ATM) खुलने जा रहा है, जहां से खाद्य सुरक्षा के लाभार्थी अपने राशन कार्ड के जरिये राशन प्राप्त कर सकेंगे। राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने बुधवार को यह जानकारी दी।
क्या है अनाज एटीएम का मकसद?

गोदारा ने कहा कि इस व्यवस्था का सबसे ज्यादा लाभ ऐसे मजदूर परिवारों को होगा, जो सुबह जल्दी काम पर निकल जाते हैं और देर रात तक घर लौटते हैं। उन्होंने कहा कि लाभार्थियों की सुविधा के लिए अनाज एटीएम खोलने का कदम उठाया जा रहा है। ये एटीएम 24 घंटे खुले रहेंगे ताकि किसी भी समय इनसे अनाज लिया जा सके। इससे लोगों को राशन की दुकानों पर घंटों इंतजार करने से भी मुक्ति मिलेगी।
ये अनाज एटीएम घनी बस्तियों में संचालित किए जाएंगे, ताकि अधिक संख्या में लाभार्थी परिवार इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
कैसे काम करता है अनाज एटीएम?

यह सिस्टम ओडिशा में भी शुरू हुआ है। ओडिशा में अनाज एटीएम के जरिए लोगों को चावल दिए जाते हैं। इन अनाज एटीएम को बायोमेट्रिक टेक्नोलॉजी से लैस किया गया है, जिसमें लाभार्थी को सिर्फ मशीन के फिंगरप्रिंट सेंसर पर अपना अंगूठा रखना होता है और मशीन से अपने आप लाभार्थी की पहचान करके उसे उसके कोटे के हिसाब से राशन मिल जाता है। लाभार्थी को मिले अनाज और वजन की जानकारी मशीन की स्क्रीन पर दिखाई देगी।
कहां लगाएं जाएंगे ये एटीएम?

गोदारा ने कहा कि ये एटीएम सामुदायिक केंद्र, भारतीय खाद्य निगम के गोदाम या राशन की दुकान के पास स्थापित किए जाएंगे। खाद्य सुरक्षा योजना से अपात्रों को हटाने के लिए जारी अभियान के बारे में गोदारा ने कहा कि गिवअप अभियान के तहत प्रदेश में 54.36 लाख से अधिक सम्पन्न लोगों ने स्वेच्छा से जरूरतमंदों के हक का गेहूं लेना छोड़ा है। वहीं 73 लाख नए पात्र लाभार्थियों को योजना में जोड़ा गया है।
गोदारा ने बताया कि जयपुर जिले में सबसे अधिक 3.17 लाख वंचित पात्रों को खाद्य सुरक्षा से जोड़ा गया है। 3.07 एवं 3.04 लाख पात्र लाभार्थियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम से जोड़कर बाड़मेर दूसरे और सीकर तीसरे स्थान पर रहा।

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