26 जनवरी पर जानें रोजमर्रा की जिंदगी में आपकी असली ताकत (Picture Credit- AI Generated)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। 26 जनवरी, 1950 को जब हमारा संविधान लागू हुआ, तब भारत सही मायनों में \“गणतंत्र\“ बना। हम हर साल झंडा तो फहराते हैं, लेकिन क्या हम उस किताब को जानते हैं जिसने हमें यह हक दिया?
सच्चाई यह है कि हम जाने-अनजाने रोज अपने संविधान का इस्तेमाल करते हैं—सड़क पर चलने से लेकर अपनी बात कहने तक। पर अफसोस, हमें खुद ही अपनी ताकतों का पता नहीं। तो चलिए, आज उन खास अधिकारों (Articles) से पर्दा उठाते हैं, जो आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान और सुरक्षित बनाते हैं।
कानून सबके लिए बराबर है (Article 14)
इस आर्टिकल का सीधा-सा मतलब यह है कि देश में हर कोई कानून की नजर में एक समान है। यहां कोई छोटा या बड़ा नहीं है। किसी अपराध के लिए सजा देना हो या किसी को सुरक्षा कानून सबके लिए बराबर है और किसी के साथ भेदभाव नहीं कर सकता।
भेदभाव नहीं चलेगा (Article 15)
संविधान के इस आर्टिकल के तहत आप बिना किसी भेदभाव के अपना जीवन बिता सकते हैं। यहां के किसी भी नागरिक के साथ धर्म, जाति, रंग, लिंग और जन्मस्थान के आधार पर किसी भी तरह का कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता है। ऐसा करने पर सजा का प्रावधान है।
सरकारी नौकरी में सबको मौका (Article 16)
इस आर्टिकल के तहत भारत के हर एक नागरिक को सरकारी नौकरी करने का बराबरी का हक है। धर्म, जाति, रंग, लिंग और जन्मस्थान के आधार पर सरकारी नौकरी के लिए कोई भी व्यक्ति योग्य या अयोग्य नहीं हो सकता है।
आजादी का अधिकार (Article 19)
खुलकर जीना किसे नहीं पसंद और आज हम सभी अपनी शर्तों पर अपना जीवन खुलकर जीते हैं। इसका सबसे बड़ा श्रेय हमारे संविधान को जाता है, जिसने हमें खुलकर जीने का अधिकार दिया। इस आर्टिकल में तहत आपको निम्न तरह की आजादी मिली है, जिसका आप रोज की इस्तेमाल करते हैं-
- बोलने की आजादी
- घूमने की आजादी
- काम धंधे की आजादी
- संघ या यूनियन बनाने की आजादी
- शांतिपूर्वक और बिना हथियारों के एक जगह जमा होना
सम्मान से जीने और सुरक्षा का अधिकार (Article 21)
हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी इसी अधिकार के बल पर बिताते हैं, लेकिन फिर भी इसके बारे में सही से नहीं जानते हैं। यह संविधान का हमें दिया गया सबसे पावरफुल अधिकार है। इसका मतलब है कि आपकी जान और आजादी की सुरक्षा विधि द्वारा स्थापित कानून की जिम्मेदारी है। इसमें अब \“निजता का अधिकार\“ (Right to Privacy) और साफ हवा-पानी का अधिकार भी शामिल हो गया है।
पढ़ाई का हक (Article 21A)
पढ़-लिखकर एक अच्छा जीवन जीने का हक भी हमें हमारे संविधान से ही मिलता है। आर्टिकल 21A के तहत 6 से 14 साल के हर बच्चे को सरकारी स्कूल में मुफ्त शिक्षा पाने का हक है। कोई भी स्कूल उन्हें इसके लिए मना नहीं कर सकता।
हालांकि, दुख की बात यह है कि हम अपने सभी अधिकारों का बखूबी इस्तेमाल करते हैं, सिवाए इसके। आज भी देश में कई बच्चे पढ़ाई से वंचित है, जबकि शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है।
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (Article 25)
भारत विविधताओं का देश होने के साथ-साथ एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र भी है। इसलिए यहां रहने वाले एक नागरिक और धर्म की रक्षा के लिए यह आर्टिकल अहम माना गया है। इसके तहत यहां सभी को अपने धर्म को मानने, अभ्यास करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता मिलती है।
सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार (Article 32)
इसे संविधान के सबसे जरूरी अधिकारों में से एक कहा जा सकता है। इसे \“संविधान की आत्मा\“ कहा जाता है। इस आर्टिकल का इस्तेमाल करके सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं, अगर कोई ऊपर दिए गए किसी भी अधिकार को कोई छीनने की कोशिश करता है।
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Source:
Ministry of Law and Justice (Legislative Department)
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