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उत्तराखंड में अब पहचान नहीं छिपा नहीं सकेंगे वेंडर्स, क्यूआर कोड से खुलेंगे सारे पन्ने

Chikheang 2025-11-18 14:37:21 views 907
  

आइटीडीए मोबाइल एप विकसित कर रहा



अश्वनी त्रिपाठी, राज्य ब्यूराे, देहरादून। अब ठेली-फड़ी संचालक उत्तराखंड में पहचान छिपाकर काम नहीं कर पाएंगे। शहरी विकास विभाग वेंडर्स का सर्वे कर उन्हें क्यूआर कोड देने जा रहा है। यह क्यूआर कोड सभी वेंडर्स के लिए ठेलों पर लगाना अनिवार्य होगा। इसे स्कैन करते ही वेंडर्स की पूरी कुंडली सामने आ जाएगी। वेंडर का नाम, स्थायी पता, मोबाइल नंबर व आधार नंबर से लेकर राशन कार्ड तक की पूरी जानकारी क्यूआर कोड से पता चल सकेगी। ठेली संचालकों की पहचान को पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

पहचान छिपाकर व्यापार करने से तनावपूर्ण स्थतियां उपजने के कई प्रकरण सामने आने के बाद राज्य सरकार अब ठेली-फड़ी संचालकों का सर्वे कराने जा रही है। इसके लिए शहरी विकास विभाग ने आइटीडीए (इंफार्मेशन टेक्नालाजी डेवलपमेंट अथारिटी) के साथ एमओयू किया है। आइटीडीए विशेष मोबाइल एप विकसित कर रहा है।

इसके जरिए प्रदेश के करीब एक लाख स्ट्रीट वेंडरों का डिजिटल सर्वे और पंजीकरण किया जाएगा। इससे पहचान छिपाने वाले मामलों पर रोक लगेगी। प्रदेश में पारदर्शी और सुरक्षित वेंडिंग सिस्टम विकसित किया जा सकेगा। विवाद होने पर वेंडर को आसानी से ट्रेस करने के अलावा शहरों में वेंडिंग जोन की बेहतर प्लानिंग संभव होगी।

कैसे होगा सर्वे?

  • प्रत्येक निकाय की टीम मोबाइल एप के जरिए सभी ठेली संचालकों की जानकारी भरेगी।
  • एप से लोकेशन स्वतः कैप्चर होगी, इससे यह पता चलेगा कि ठेला कहां लगाया जाता है।
  • एप में आधार नंबर डालते ही एप भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण से वेरिफिकेशन करेगा।
  • वेंडर की फोटो मोबाइल कैमरे से ली जाएगी, राशन कार्ड, मोबाइल नंबर व पता दर्ज होगा।
  • एप से भरा गया डेटा तुरंत क्लाउड-बेस्ड स्टेट सर्वर पर सुरक्षित हो जाएगा।
  • हर वेंडर की एक यूनिक वेंडर आइडी जेनरेट होगी।
  • वेंडर आइडी बनने के बाद वेंडर को उसका क्यूआर कोड मिलेगा।
  • क्यूआर कोड को प्रिंट कर ठेले पर लगाना अनिवार्य होगा।


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ऐसे काम करेगा क्यूआर कोड

  • ग्राहक मोबाइल कैमरा से क्यूआर कोड को स्कैन करेगा।
  • क्यूआर कोड स्कैन करने पर आधिकारिक पोर्टल खुलेगा।
  • इसमें वेंडर की सार्वजनिक हो सकने वाली जानकारी जैसे नाम, पहचान, वेंडर आइडी आदि दिखेगी।


\“डिजिटल पहचान से अवैध तौर पर लगने वाले ठेलों में कमी आएगी। ठेला संचालक पीएम स्वनिधि योजना का लाभ ले सकेंगे। वेंडर्स को बिना गारंटी लोन व डिजिटल भुगतान पर कैशबैक की सुविधा मिल पाएगी।\“
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-वैभव गुप्ता, संयुक्त निदेशक, शहरी विकास विभाग
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