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आज से नया लेबर लॉ: 1 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी, कॉन्ट्रैक्ट वालों को भी पे स्केल; ओवरटाइम पर डबल पेमेंट

Chikheang 2025-11-22 01:08:40 views 1290
  

चार नए लेबर कोड लागू



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सरकार ने शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला लेते हुए चार लेबर कोड तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए हैं। इस कोड के लागू होते ही पहले के 29 श्रम कानून खत्म हो गये। अब उनकी जगह पर एक एकीकृत और सरल कानूनी ढांचा काम करेगा। ये नये लेबर कोड भारत के लेबर गवर्नेंस को मॉडर्न बनाने के मकसद से एक अहम हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
लागू किए गये ये इस प्रकार हैं।

मजदूरी पर कोड (2019)
इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड (2020)
सोशल सिक्योरिटी पर कोड (2020)
ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (OSHWC) कोड (2020)

सरकार ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि नया फ्रेमवर्क दशकों पुराने लेबर नियमों को आसान बनाएगा। वर्कर वेलफेयर को बढ़ावा देने के साथ सेफ्टी स्टैंडर्ड को मजबूत करेगा।

इन कानूनों से भारत का लेबर इकोसिस्टम, दुनिया की सबसे अच्छी प्रैक्टिस करने वाला बनेगा। सालों की सलाह और तैयारी के बाद इसे लागू होना 21 नवंबर 2025 से लागू किया जा रहा है।
भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स के लिए एक मॉडर्न फ्रेमवर्क

सरकार ने कहा कि इन कोड का मकसद भविष्य के लिए एक सुरक्षित वर्कफोर्स तैयार करना और मजबूत इंडस्ट्री बनाना है। सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि यह बदलाव रोजगार पैदा करने में मदद करेगा और आत्मनिर्भर भारत के तहत लेबर सुधारों को आगे बढ़ाएगा।

भारत के कई लेबर कानून 1930-1950 के दशक के हैं, जिन्हें आज की डिजिटल और गिग-ड्रिवन इकॉनमी से बहुत अलग इकॉनमिक स्ट्रक्चर के लिए बनाया गया था। इतने सालों में इन पुराने कानूनों ने कम्प्लायंस की मुश्किलें बढ़ा दीं और वर्कर्स के बड़े हिस्से को सोशल सेफ्टी नेट से बाहर कर दिया।

लेबर कोड्स इन प्रोविज़न्स को चार बड़े कानूनों में मिलाते हैं, जिन्हें बेहतर सैलरी, सोशल सिक्योरिटी, ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, जेंडर इक्वालिटी और आसान कम्प्लायंस पक्का करने के लिए डिजाइन किया गया है।
लेबर कोड्स में क्या कुछ बदलेगा?

  • सभी वर्कर्स के लिए जरूरी अपॉइंटमेंट लेटर।
  • ट्रांसपेरेंसी और फॉर्मलाइजेशन को मजबूत करना।
  • यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी कवरेज, जिसमें गिग और प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स शामिल हैं, PF, ESIC, इंश्योरेंस और दूसरे फायदे।
  • सभी वर्कर्स के लिए मिनिमम वेज का कानूनी अधिकार, जो पहले के लिमिटेड, शेड्यूल्ड-इंडस्ट्री फ्रेमवर्क की जगह लेगा।
  • 40 साल से ज्यादा उम्र के वर्कर्स के लिए फ़्री सालाना हेल्थ चेक-अप, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को बढ़ावा देना।
  • सैलरी का समय पर पेमेंट ज़रूरी, अपनी मर्ज़ी से या देर से सैलरी देने के तरीकों को खत्म करना।
  • महिलाओं को माइनिंग और खतरनाक इंडस्ट्रीज़ सहित सभी सेक्टर्स में सुरक्षा उपायों और सहमति के साथ नाइट शिफ्ट में काम करने की इजाज़त।
  • छोटे और खतरनाक जगहों सहित पूरे भारत में ESIC कवरेज।
  • सिंगल रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस और रिटर्न, जिससे कम्प्लायंस का बोझ तेज़ी से कम होगा।
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