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अयोध्या में दिव्यता का संगम: रामलला दक्षिण–उत्तर भारतीय हस्तकला से सजे खास पीतांबर में देंगे दर्शन

Chikheang 2025-11-25 05:36:04 views 643
  



शालिनी देवरानी, दक्षिणी दिल्ली। अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के बाद मंगलवार को होने जा रहा ध्वजारोहण समारोह दिव्यता और वैभव का अद्वितीय संगम बनेगा। विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक, पावन व भव्य अवसर पर प्रभु श्रीराम स्वर्ण सुसज्जित पीतांबर परिधान में अलौकिक आभा बिखेरते हुए दर्शन देंगे। समारोह के दौरान उनके परिधानों में दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक की छटा देखने को मिलेगी, जिन्हें दिल्ली के डिजायनर मनीष त्रिपाठी ने सजाया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

प्रभु राम की पोशाकों में हमेशा विविध राज्यों की हस्तकला, वस्त्रों और डिजाइन का मिश्रण रहता है। मनीष त्रिपाठी बताते हैं कि ध्वजारोहण समारोह में प्रभु खास स्वर्ण से सुशोभित पीतांबर वस्त्र धारण करेंगे। इन वस्त्रों की बुनाई रेशमी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध आंध्र प्रदेश राज्य के धर्मावरम में की गई है, जहां इसके लिए खास हथकरघा लगाया गया है।

वहीं, डिजाइनिंग और कढ़ाई का काम दिल्ली में पूरा हुआ है। पीले रेशमी वस्त्र दक्षिण भारतीय शैली से सजाए गए हैं, जिनमें कांचीपुरम सिल्क के पारंपरिक रेशमी वस्त्रों की दिव्य चमक और शुद्ध स्वर्ण जरी की महीन कढ़ाई दिखेगी।

पोशाकों पर शंख, चक्र, पद्म, मयूर, कमल, बेल पत्ती, स्वास्तिक सहित दक्षिण भारत की प्राचीन मंदिर परंपरा से सजे मांगलिक वैष्णव चिन्हों को उकेरा गया है। सर्दी को देखते हुए प्रभु को ऊनी पट्टिकाएं भी चढ़ाई जाएंगी, जोकि लद्दाख के पश्मीना से तैयार की गई हैं।

परिकल्पना से पोशाक तैयार करने का काम श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के सहयोग और मार्गदर्शन में सालभर में पूरा हुआ है। राम दरबार से लेकर मंदिर परिसर में स्थापित सभी प्रतिमाओं को स्वर्ण जरी से सजे पीले वस्त्र ही धारण कराए जाएंगे।
दिन और मौसम से तय होते हैं परिधान

ग्रेटर कैलाश के रहने वाले मनीष करीब दो सालों से प्रभु राम के परिधान सजा रहे हैं। रामलला हर दिन के भाव और ऊर्जा के मुताबिक वस्त्र पहनते हैं, जिनमें सोमवार को श्वेत, मंगलवार को लाल, बुधवार का हरे, गुरुवार को पीले, शुक्रवार को क्रीम, शनिवार को नीले और रविवार का गुलाबी रंग निर्धारित हैं।

विशेष पर्व व त्योहारों पर प्रभु पीतांबर वस्त्र धारण करते हैं। प्रभु एक जैसे वस्त्रों से ऊबें नहीं, इसलिए निर्धारित पैटर्न में विविधता लाई जाती है और मौसम और परंपरा का ध्यान रखते हुए त्योहारों पर रेशमी, गर्मियों में मलमल और कड़ाके की सर्दी में पश्मीना व ऊनी वस्त्र पहनाए जाते हैं।

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