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गंगा बेसिन में प्रदूषण कम करने को प्रमुख शोध परियोजनाओं को मंजूरी, पुनरुद्धार पर जोर

LHC0088 2025-11-27 01:43:15 views 1239
  

एनएमसीजी ने परियोजनाओं को दी मंजूरी।  



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने सोमवार को कहा कि उसने वैज्ञानिक तरीके से नदी प्रबंधन को मजबूत करने और गंगा बेसिन में प्रदूषण कम करने के प्रयासों में तेजी लाने के उद्देश्य से कई प्रमुख शोध एवं बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी है। ये निर्णय एनएमसीजी की 67वीं कार्यकारी समिति की बैठक में लिए गए जिसकी अध्यक्षता इसके महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल ने की। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस बैठक में आंकड़ों पर आधारित योजना, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन और गंगा व यमुना दोनों नदियों के पुनरुद्धार पर जोर दिया गया। जल संसाधन विभाग और मिशन में भाग लेने वाले राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल हुए जिसमें शोध-आधारित कवायदों पर जोर दिया गया।
आधिकारिक बयान में क्या कहा गया?

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि कार्यकारी समिति ने कई अध्ययनों को मंजूरी दी है जो गंगा बेसिन की वैज्ञानिक समझ को गहरा करेंगे। इसमें हिमालयी ग्लेशियरों की निगरानी और गंगा का \“डिजिटल ट्विन\“ बनाना, सोनार (साउंड नेविगेशन ऐंड रेंजिंग)-आधारित नदी तल सर्वेक्षण, पैलियोचैनल (गाद से भरी हुई पुरानी सूखी नदी जिसका रास्ता अब मौजूद नहीं) के लिए पर्याप्त जल-प्रबंधन और ऐतिहासिक भू-स्थानिक मानचित्रों का डिजिटलीकरण शामिल है।

\“डिजिटल ट्विन\“ किसी भौतिक वस्तु, प्रक्रिया या सिस्टम का एक आभासी प्रतिनिधित्व है जो सेंसर से रियल-टाइम डाटा का उपयोग करके उसके प्रदर्शन का अनुकरण करता है। इसका उपयोग भविष्यवाणी, विश्लेषण और बेहतर निर्णय लेने के लिए किया जाता है ताकि समस्याओं को होने से पहले ही रोका जा सके।
दिल्ली में यमुना के पुनरुद्धार के लिए विशेष कवायद पर भी जोर

कार्यकारी समिति ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में महानंदा नदी की सफाई के लिए नालों को रोकने और मोड़ने तथा नए सीवेज उपचार संयंत्रों (एसटीपी) के निर्माण के लिए 361.86 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी। दिल्ली में यमुना के पुनरुद्धार को समर्थन देने के लिए समिति ने एसटीपी से उपचारित सीवेज को ही नदी में प्रवाहित करने पर विशेष जोर दिया गया।

बयान में कहा गया है कि इस योजना में जहांगीरपुरी नाले से अनुपचारित प्रवाह को रोकना, नए पंपिंग स्टेशनों का निर्माण, राइजिंग मेन्स (इमारत में पानी की आपूर्ति के लिए इस्तेमाल होने वाली मुख्य पाइपलाइन जो पानी को नीचे से ऊपरी मंजिलों तक ले जाती है) और री-एन्फो‌र्स्ड सीमेंट कंक्रीट (आरसीसी) चैनल बिछाना शामिल है। जन पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से समिति ने दिल्ली-एनसीआर के 200 स्कूलों के 2.5 लाख से अधिक छात्रों को शामिल करने के लिए \“गंगा के लिए युवा, यमुना के लिए युवा\“ पहल को मंजूरी दी।\

यह भी पढ़ें: जलवायु परिवर्तन से गंगा बेसिन के इलाकों में बारिश पर पड़ेगा असर, प्रतिदिन 11 मिलीमीटर घट जाएगी
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