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Bihar Assembly Election 2025: बिहार में विधानसभा का यह पहला चुनाव, जाति से अधिक अपने हित पर चर्चा कर रहे लोग

deltin33 2025-10-3 20:36:26 views 1259
  पहला चुनाव जब जाति से अधिक हित पर चर्चा





भुवनेश्वर वात्स्यायन,पटना। बिहार में विधानसभा 2025 का चुनाव इस मायने में पहला चुनाव है जब लोग वोट के संदर्भ में अपने हितों की बात पर केंद्रित हो रहे। हाल के दिनों में की गयी घोषणाएं खूब कही और सुनी जा रही। आम तौर पर बिहार में विधानसभा का चुनाव जातिगत समीकरण, नेताओं की ताकत और दल के हिसाब से प्रभावी रहा है। पर इस बार योजनाओं की कहानी अधिक प्रभावी दिख रही अब तक। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
तीन बातों की चर्चा के असर पर खूब हो रही बात

इस बार के विधानसभा चुनाव को केंद्र में रख तीन बातों की खूब हो रही चर्चा हो वोटरों के बीच। पहली चर्चा 125 यूनिट मुफ्त बिजली की है। एक समय जब बिहार में स्मार्ट मीटर लगाए जाने की गति तेज हुई तो लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा था कि उन्हें बिजली के मद में अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ रही। बिजली कंपनी ने उपभोक्ताओं को समझाने के लिए कई तरह के जतन किए।



इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह घोषणा कर दी कि बिहार में सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मफ्त बिजली प्रति माह मिलेगी। इस घोषणा से बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ताओं की सूची सामने आयी जिनके बिजली बिल शून्य हो गए। उपभोक्ताओं की ऐसी सूची भी सामने आयी जिनके बिजली बिल की राशि आधी हो गयी। चुनाव के इस मौसम में इसकी खूब चर्चा है।

दूसरी चर्चा मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की है। इसके तहत सभी महिलाओं के बैंक खाते में सरकार दस-दस हजार रुपए भेज रही। छह माह बाद अगर उनके काम को संतोषजनक रहा तो दो लाख रुपए और मिलेंगे। तीसरी सबसे अधिक चर्चा जिसकी है, वह है सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना की राशि में बढ़ोतरी। इसके तहत मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना की राशि 400 रुपए से बढ़ाकर 1100 रुपए कर दी गयी है।



विधवा व दिव्यांग पेंशन योजना की राशि भी 1100 रुपए प्रतिमाह कर दी गयी है। लाभुकों के खाते में जुलाई से ही यह राशि डीबीटी के माध्यम से भेजी रही। सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत जिन लोगों के पेंशन बढ़े उनकी संख्या 1.40 करोड़ है। इनके बीच अपने हितों पर खूब बात हो रही।
इनके बीच भी अपने हितों ,की बात

कई ऐसे कामकाजी वर्ग है जो इस चुनाव में अपने हितों पर केंद्रित हो रहे, उनमें अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों के बीच काम करने वाले विकास मित्र शामिल हैं। सरकार इन्हें टैबलेट खरीदने के लिए एकमुश्त 25 हजार रुपए दे रही। इनके परिवहन भत्ता को 1900 रुपए से बढ़ाकर 2500 रुपए कर दिया गया। स्टेशनरी भत्ता 900 रुपए से बढ़ाकर 1500 रुपए किए जाने का निर्णय लिया गया।



शिक्षा सेवकों को स्मार्ट फोन खरीदने के लिए दस-दस हजार रुपए दिए जा रहे। सभी स्नातक उत्तीर्ण बेरोजगारों को स्वयं सहायता भत्ता के रूप में एक-एक हजार रुपए दो वर्षों तक दिए जाने का फैसला लिया गया। ममता और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय भी बढ़ाए गए। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत पढ़ाई के लिए मिलने वाली ऋण राशि को ब्याज मुक्त करने का सरकार ने फैसला लिया।
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