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उटंगन हादसे के बाद हर गली से राेने की आवाज, हर घर में सन्नाटा; घरों में नहीं जले चूल्हे

LHC0088 2025-10-4 20:36:32 views 1274
  नदी में डूबे गगन व हरेश की मौत पर रोती मां, हादसे में घर के दोनों चिराग बुझ गए जागरण





संवाद सूत्र, जागरण,अकोला। मुख्य सड़क से कुशियापुर गांव के लिए मुड़ने के बाद 10 कदम चलते ही एक घर से रोने की आवाज सुनाई पड़ते ही कदम ठिठक जाते हैं। यह गुरुवार को विसर्जन में डूबे ओके का घर था, मां शांति देवी और बाबा का रोकर बुरा हाल था। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

गांव में 200 मीटर अंदर जाने पर मनोज, बीनेश, ओमपाल, गगन और अभिषेक के घर पड़ते है। सभी 200 मीटर के दायरे में रहते हैं। एक दूसरे के सुख-दुख में शामिल होना उनके जीवन का हिस्सा है।



किसी एक पर मुसीबत हो तो सब साथ खड़े रहते हैं, लेकिन शुक्रवार को पूरा गांव सिसक रहा था। हर गली से रोने की आवाज आ रही थी। परिवार की महिलाअों का करुण क्रंदन लोगों का दिल दहला रहा था।

गुरुवार को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए हादसे के बाद कुशियापुर गांव का माहौल मातम और सन्नाटे में डूबा हुआ है।ओमपाल के परिवार का बुरा हाल था। उनके पिता की 10 वर्ष पहले मृत्यु हो गई थी। इकलौते बेटे थे। वृद्ध मां के अलावा पत्नी रचना व दो बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी।



मां और पत्नी का रोकर बुरा हाल था। गांव की गलियों से लेकर चौपाल तक हर जगह सन्नाटा पसरा हुआ था। हादसे को 36 घंटे बीत चुके हैं, घरों के चूल्हे तक नहीं जले। हर कोई अपने आंसू रोक नहीं पा रहा है।

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हादसे में गांव के पांच परिवारों ने अपने चिराग खो दिए हैं, वहीं अन्य डूबे हुए युवकों की तलाश जारी है। हर घर से रोने-बिलखने की आवाजें सुनाई दे रही हैं। पुरुष स्तब्ध खामोशी में आंखें नम किए हुए हैं। बच्चों तक की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। गांव के बुजुर्गों का कहना था कि ऐसा हादसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा।

गांव के लोग लोग एक-दूसरे को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे थे। मगर, किसी के पास सांत्वना के शब्द नहीं थे। चारों ओर सिर्फ आंसुओं और दर्द की नदी बह रही है। शुक्रवार को गांव में किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। ग्रामीणों का कहना था कि जब पूरा गांव ही गम में डूबा हो तो किसी के मन में निवाले की इच्छा भी कैसे उठे।
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