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आदिवासी समुदाय को एसआइआर फार्म नहीं भरने के लिए उकसा रहे थे, पुलिस ने दो लोगों को किया गिरफ्तार

LHC0088 2025-12-11 10:36:57 views 398
  

आदिवासी समुदाय को एसआइआर फार्म नहीं भरने के लिए उकसा रहे थे, दो गिरफ्तार (सांकेतिक तस्वीर)



राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। बंगाल पुलिस ने आदिवासी समुदाय को एसआइआर फार्म नहीं भरने के लिए उकसाने व गुमराह करने के मामले दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
आरोपित आदिवासियों को कह रहे थे ये बात

आरोपित आदिवासियों को समझा रहे थे कि वे देश के मूल निवासी हैं और उनके लिए केवल आदिवासी संगठन \“अंतरराष्ट्रीय मांझी सरकार\“ है। यदि कोई इस सरकार की सदस्यता स्वीकार कर लेता है, तो उसे एसआइआर प्रक्रिया में भाग लेने की आवश्यकता नहीं है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

यह सरकार आदिवासियों के बीच एक समानांतर सामाजिक-न्यायिक व्यवस्था के रूप में कार्य करती है, जो सरकारी व्यवस्था से अलग होकर आदिवासियों के लिए न्याय और अधिकारों की वकालत करती है।

गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम संतोष मांडिर व भबेंद्र मरांडी है। संतोष मांडिर बांकुड़ा के बारिकुल का निवासी है, जबकि भबेंद्र मरांडी पड़ोसी राज्य ओडिशा के मयूरभंज का। दोनों के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी सहित कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

बता दें कि पिछले दिनों बांकुड़ा के रानीबांध और पुरुलिया के बंदोवान विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों के आदिवासी लोगों ने एसआइआर फार्म भरने से इन्कार कर दिया था। उन्होंने एसआइआर प्रक्रिया में भाग लेने से मना कर दिया। जब सरकारी अधिकारियों ने गांव-गांव जाकर उन्हें समझाने की कोशिश की, तो उनके आसपास विरोध प्रदर्शन भी हुए।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि माझी सरकार का संचालन छत्तीसगढ़ से होता है, लेकिन ओडिशा के मयूरभंज क्षेत्र के कई लोगों ने राज्य में इसकी शाखाओं के विस्तार में अहम भूमिका निभाई है।

जांच में पता चला कि लोगों को तीन हजार रुपये में मांझी सरकार का सदस्य बनने पर देश के सभी हिस्सों में मुफ्त यात्रा और नागरिकता जैसे विभिन्न लाभों का लालच देकर ठगा गया।
छत्तीसगढ़ से संचालित होती है अंतरराष्ट्रीय मांझी सरकार

छत्तीसगढ़ से संचालित अंतरराष्ट्रीय मांझी सरकार, जिसे कंगला मांझी सरकार भी कहते हैं, स्वतंत्रता सेनानी हीरा सिंहदेव उर्फ कंगला मांझी द्वारा गठित एक समानांतर आदिवासी संगठन है, जो जल, जंगल, जमीन के अधिकारों और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए काम करता है, जिसकी जड़ें सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फ़ौज से जुड़ी हैं और इसके वर्दीधारी सैनिक आज भी देशभर में सक्रिय हैं। इन्हें मांझी सैनिक कहा जाता है।
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