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उत्तराखंड में ड्रंक एंड ड्राइव पर हुई कड़ी कार्रवाई, सड़क दुर्घटनाओं में आई कमी

LHC0088 2025-12-14 13:37:20 views 460
  

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण



सोबन सिंह गुसांई, देहरादून। राजधानी में बढ़ती यातायात समस्या को लेकर क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल में \“लाइसेंस टू वायोलेट? एवरीडे लालेसनेस आन इंडियन रोड्स\“ सत्र में गहन चर्चा हुई। इस दौरान पुलिस कार्रवाई व सड़क दुर्घटनाओं का डाटा भी सत्र में रखा गया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस सत्र में पुलिस अधीक्षक यातायात लोकजीत सिंह ने कहा कि आज के समय में ट्रैफिक समस्या समाज के समक्ष बड़ी चुनौती बनकर आई है। इस समस्या की जड़ तक पहुंचकर सभी को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा।

सत्र के दौरान उत्तराखंड में हुए ओएनजीसी चौक, राजपुर में मर्सडीज व अल्मोड़ा में बस खाई गिरने जैसे दिल दहलाने वाले हादसों पर चर्चा हुई। इस दौरान एसपी लोकजीत सिंह ने बताया कि इन बड़े हादसों के बाद हादसों के कारणों को जानने के लिए तह तक पहुंचे।

जेपी रिसर्च इंस्टीट्यूट से इसकी स्टडी भी करवाई गई। स्टडी में यह बात सामने आई कि ड्रंक एंड ड्राइव के कारण रात्रि के समय हादसे बढ़ रहे हैं, जिसके बाद रात्रि चेकिंग शुरू करते हुए इंफोर्समेंट की कार्रवाई की गई। इसके सार्थक परिणाम सामने आए।

उन्होंने सत्र के बीच में इंफोर्समेंट की कार्रवाई का डाटा भी रखा। बताया कि वर्ष 2023 में 190606 चालान करते हुए 9239 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए। इस साल हादसों की संख्या 426 रही। वहीं वर्ष 2024 में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले 130018 का चालान करते हुए 11113 चालान किए जबकि हादसों की संख्या 470 रही। जबकि 2025 में इंफोर्समेंट की कार्रवाई और अधिक बढ़ाते हुए 189619 चालान करते हुए 16409 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए। लगातार कार्रवाई के चलते इस साल हादसों की संख्या घटकर 399 रह गई।

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नाबालिग वाहन चालकाें पर भी कसा शिकंजा
ड्रंक एंड ड्राइव के अलावा दुर्घटनाओं का दूसरा बड़ा कारण नाबालिग की ओर से वाहन चलाना सामने आया। नाबालिगों पर कार्रवाई की बजाए मौके से उनके स्वजनों को फोन किया गया। स्वजनों से शपथ दिलाई गई कि वह नाबालिगों के हाथ में वाहन की चाबियां नहीं देंगे। लगातार एक माह तक चले इस अभियान के सार्थक परिणाम सामने नजर आए।

एसपी देहात जया बलूनी ने कहा कि केवल पुलिस का डर दिखाकर या कार्रवाई करके अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आएंगे। इस तरह के लिटरेचर फेस्टिवल के माध्यम से समाज को नई राह दिखाई जा सकती है।
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