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पहली बार सेना की पशु टुकड़ी दिखाएगी गणतंत्र दिवस पर करतब, परेड में ऊंट, घोड़े और शिकारी पक्षी होंगे शामिल

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नई दिल्ली में बुधवार को कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार सम्मिलित होने के लिए अभ्यास करती सेना की रीमाउंट एंड वेटरनरी कार्ल्स की टुकड़ी। फोटो-एएनआई



नई दिल्ली, एएनआई। Republic Day Parade 2026: इस साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत एक दुर्लभ दृश्य का साक्षी बनेगा। भारतीय सेना के पशुओं की टुकड़ी पहली बार कर्तव्य पथ पर मार्च करेगी। भारतीय सेना के रीमाउंट एवं वेटरनरी कोर का एक विशेष रूप से तैयार किया गया पशु दस्ता प्रदर्शित किया जाएगा, जो देश की सबसे चुनौतीपूर्ण सीमाओं की रक्षा में पशुओं की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करेगा। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस दल में दो बैक्टि्रयन ऊंट, चार जांस्कर टट्टू, चार शिकारी पक्षी, 10 भारतीय नस्ल के सैन्य कुत्ते और पहले से सेवा में मौजूद छह पारंपरिक सैन्य कुत्ते शामिल होंगे। ये सभी मिलकर भारतीय सेना के परिचालन तंत्र में परंपरा, नवाचार और आत्मनिर्भरता का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करते हैं।
बैक्टि्रयन ऊंट करेंगे काफिले की अगुआई

इस काफिले की अगुआई बैक्टि्रयन ऊंट करेंगे, जिन्हें हाल ही में लद्दाख के सर्द इलाके में तैनाती के लिए शामिल किया गया है। बैक्टि्रयन ऊंट लद्दाख की नुब्रा घाटी में पाए जाते हैं। इनकी पीठ पर दो कूबड़ होते हैं।

  

अत्यधिक ठंड, कम हवा और 15 हजार फीट से अधिक ऊंचाई के लिए पूरी तरह से अनुकूलित ये ऊंट 250 किलोग्राम तक का भार उठा सकते हैं और कम से कम पानी और चारे के साथ लंबी दूरी तय कर सकते हैं। इनकी तैनाती से रेतीले इलाकों और खड़ी ढलानों पर वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास रसद सहायता और गश्ती क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
सहनशक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं जांस्कर टट्टू

परेड में लद्दाख की दुर्लभ और स्थानीय नस्ल के जांस्कर टट्टू भी चलेंगे। अपने छोटे कद के बावजूद ये टट्टू असाधारण सहनशक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। ये टट्टू 15 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर और -40 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में 40 से 60 किलोग्राम तक का भार लेकर लंबी दूरी तय कर सकते हैं।

2020 में सेना में शामिल होने के बाद से इन्होंने सियाचिन ग्लेशियर सहित कुछ सबसे कठिन इलाकों में अपनी सेवाएं दी हैं। रसद सेवाओं के अलावा जांस्कर टट्टू घुड़सवार गश्ती दल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये टट्टू कभी-कभी एक ही दिन में 70 किलोमीटर तक की दूरी तय करते हैं और जोखिम भरे क्षेत्रों में सैनिकों के साथ मुस्तैद रहते हैं।
पैनी नजर रखते हैं शिकारी पक्षी

इस सैन्य टुकड़ी में पैनी नजर रखने के लिए चार शिकारी पक्षी भी शामिल होंगे, जिनका उपयोग पक्षियों के टकराने से होने वाले नुकसान को नियंत्रित करने और निगरानी करने के लिए किया जाएगा, जो परिचालन सुरक्षा के लिए प्राकृतिक क्षमताओं के सेना के नवोन्मेषी उपयोग को दर्शाता है।

  
सेना के कुत्तों को कहा जाता है \“मूक योद्धा\“

परेड का एक महत्वपूर्ण आकर्षण सेना के कुत्ते होंगे, जिन्हें अक्सर भारतीय सेना का \“\“मूक योद्धा\“\“ कहा जाता है। मेरठ के आरवीसी सेंटर और कालेज में रिमाउंट और पशु चिकित्सा कोर द्वारा पाले-पोसे और प्रशिक्षित किए गए ये कुत्ते आतंकवाद विरोधी अभियानों, विस्फोटक और बारूदी सुरंगों का पता लगाने, ट्रै¨कग, सुरक्षा, आपदा राहत और खोज एवं बचाव अभियानों में सैनिकों का सहयोग करते हैं।
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