जागरण संवाददाता, नोएडा। सड़क दुर्घटना में घायल, आग से झुलसे या फिर किडनी संबंधित बीमारी का इलाज कराने के लिए बाल मरीजों को दिल्ली या प्राइवेट अस्पताल के चक्कर नहीं काटने होंगे।
सेक्टर-30 के चाइल्ड पीजीआइ में ही मरीज को इलाज के साथ-साथ वरिष्ठ चिकित्सकों से परामर्श भी मिलेगा। प्रबंधन ने नेफ्रोलाॅजिस्ट और प्लास्टिक सर्जन की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली है। एक विशेषज्ञ ने संस्थान को ज्वाइन कर मरीजों को स्वास्थ्य लाभ देना शुरू कर दिया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
पीजीआइ में पिछले कई वर्षों से प्लास्टिक सर्जन और नेफ्रोलाॅजिस्ट नहीं होने से मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली, लखनऊ या फिर अन्य राज्यों के अस्पताल में जाकर इलाज कराना पड़ता था। इसमें उन्हें अतिरिक्त जेब खर्च भी झेलना पड़ता था।
यही नहीं, त्वचा संबंधित दिक्कत झेल रहे मरीजों को भी इलाज के लिए बाहर रेफर किया जाता है। दीपावली के समय आग से झुलसे या फिर सड़क दुघर्टना में घायलों को पूरा नहीं मिल पाता था। प्लास्टिक सर्जन और नेफ्रोलाॅजिस्ट न होने से मरीजों की बढ़ती परेशानी के चलते लगातार मांग पर प्रबंधन ने गंभीरता से संज्ञान लिया।
दो महीने पहले विज्ञापन और अन्य माध्यम से दोनों चिकित्सकों की भर्ती की कार्रवाई की। संस्थान के निदेशक डाॅ. अरुण कुमार सिंह का कहना है कि नेफ्रोलाॅजिस्ट और प्लास्टिक सर्जन दोनों चिकित्सकों की नियुक्त की प्रक्रिया हो गई है। नेफ्रोलाॅजिस्ट ने संस्थान को ज्वाइन कर लिया है जबकि प्लास्टिक सर्जन ने कुछ समय बाद ज्वाइनिंग करने की बात कही है।
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