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Kishanganj News: 40 हेक्टेयर में होगा तालाबों का निर्माण, जल संरक्षण की होगी पहल

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40 हेक्टेयर में होगा तालाबों का निर्माण, जल संरक्षण की होगी पहल



संजय मिश्रा, किशनगंज। जल संरक्षण इंसानी जीवन के लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण बन गया है। देखा जाए तो जल संरक्षण कई प्रकार के सुधारों को संदर्भित करता है। इसके अंतर्गत नई तकनीक जल के उपयोग में दक्षता और कमी लाने में सहायक बनता हैं।

दूसरी ओर, जल संरक्षण जल संरक्षण की एक क्रिया है। जल संरक्षण उन विकास और नवाचारों से संबंधित है जो जल का अधिक कुशलता से उपयोग करने में सहायक होते हैं।

जल संरक्षण सभी क्षेत्र के लोगों के लिए जरूरी है। जिससे कि बारिश के पानी को तालाब, पोखर और डैम में संरक्षित कर उसका पुन: उपयोग किया जा सके। इसके अलावा छोटे तालाब, भूमिगत टैंक और सोख्ता के माध्यम से भी जल का सुगमता पूर्वक संरक्षण किया जा सकता है।

मत्स्य विभाग के विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026 में जिला के प्रखंड क्षेत्र में 40.35 हेक्टेयर जमीन पर तालाब का निर्माण होना है। साल 2025 में 36.03 हेक्टेयर में तालाबों का निर्माण किया जा चुका है।

विभागीय सूचना के अनुसार रियरिंग तालाब, नए तालाब और आद्र भूमि के विकास के तहत तालाब का निर्माण कराया जाएगा। इस दिशा में मत्स्य विभाग व मनरेगा से तालाब का निर्माण कराया जा रहा है। तालाब निर्माण के लिए ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को जागरूक भी किया गया है।

जल संरक्षण के साथ ही मत्स्य पालन पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि तालाब साफ सुथरा रहने के साथ मत्स्य पालन के माध्यम से आमदनी का साधन भी बने। साथ ही जरूरत पड़ने पर लोग तालाब के पानी का उपयोग उबालकर पीने में भी कर सके। नए साल में जल संरक्षण के लिए विभाग द्वारा और भी प्रयास किए जाएंगे।

नव वर्ष 2026 में समेकित और चौर विकास योजना के तहत 35 तालाब का निर्माण करवाया जा रहा है। नाव एवं जाल पैकेज वितरण योजना के तहत मछुआरों के बीच चार नाव और एक सौ जाल के वितरण का लक्ष्य है। इसके अंतर्गत नाव और जाल में 90 फीसद का अनुदान मछुआरों को मिलेगा।

मुख्यमंत्री मछुआरा कल्याण योजना के तहत 50 फीसद राशि के अनुदान पर प्रत्येक प्रखंड में एक-एक वाहन मछुआरा को दिया जाएगा। वहीं 25 डिसमिल क्षेत्र वाले तालाब में मत्स्य पालन करने वाले मछुआरों के बीच छह सोलर पंपसेट वितरित करन का लक्ष्य है।


जिले में मत्स्य विभाग के 244 सरकारी जलकर व तालाब हैं। इसके अलावा 282 निजी तालाब खोदे गए हैं। जिसमें मत्स्य पालन के अलावा जल संरक्षण का भी काम किया जा रहा है। नए वित्तीय वर्ष 2026 में रियरिंग तालाब बनाने के लिए किसानों प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही चौर विकास योजना के विकास के तहत तालाब निर्माण करना है। मत्स्य पालन के तहत विशेष सहायता के तहत भी तालाब का निर्माण होना है। - प्रसुन्न कुमार प्रभात, डीएफओ
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