राज्य ब्यूरो, रांची । स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तथा झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय बहुभाषी शिक्षा सम्मेलन बुधवार से बीएनआर चाणक्या में शुरू होगा।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार इसका उद्धाटन करेंगे। इस सम्मेलन में शिक्षा में क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा को बढ़ावा देने और भाषा नीति तैयार करने पर मंथन होगा।
इसमें देशभर से शिक्षाविद, शिक्षक और विशेषज्ञ के अलावा आठ राज्यों के शिक्षा पदाधिकारी सम्मिलित होंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा देने पर जोर दिया गया है।
इसे ध्यान में रखते हुए इस सम्मेलन का आयोजन किया गया है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अनुरूप देशभर में मातृभाषा आधारित बहुभाषी शिक्षा को सुदृढ़ करना तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य व केंद्र के बीच साझा समझ और रणनीति विकसित करना है।
इसमें झारखंड, बिहार, असम, छत्तीसगढ़, राजस्थान, त्रिपुरा, हरियाणा, ओडिशा और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के शिक्षाविदों द्वारा बहुभाषी शिक्षा के अनुभव, नवाचार और सीख साझा किए जाएंगे।
इसके जरिए देश में समावेशी, गुणवत्तापूर्ण एवं बाल-केंद्रित शिक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच सांझा किया जाएगा, जिससे न केवल बच्चों के अधिगम स्तर में सुधार होगा बल्कि स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण को भी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी।
बताते चलें कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप झारखंड में \“\“\“\“पलाश\“\“\“\“ कार्यक्रम के तहत वर्तमान में पांच जनजातीय भाषाओं में बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। सम्मेलन में उन जिलों के प्रतिनिधि भी पलाश से आए परिणाम को साझा करेंगे।
इस सम्मेलन में सम्मिलित होने के लिए एनसीईआरटी से प्रो. उषा शर्मा, एलएलएफ से डा. धीर झिंगरन, प्रो. रामानुजन मेघनाथन, अनुभव राजेश एवं डा. महेंद्र मिश्र, रमेनी मुंडा आदि भी सम्मिलित होंगे। |