गर्भवती महिला की सांकेतिक तस्वीर।
अनिल बेताब, फरीदाबाद। जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से बनाए गए आयुष्मान आरोग्य केंर्दों में जच्चा-बच्चा को पूरी तरह बेहतर सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। विभाग के अधिकारी जच्चा-बच्चा को 24 घंटे सेवा का दावा तो करते हैं, मगर सच्चाई इससे कुछ अलग है।
अधिकांश केंद्रों में नर्सिंग अधिकारी ही डिलीवरी का सारा कार्य संभाल रहीं हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाली 25 प्रतिशत से अधिक गर्भवती को रेफर किया जा रहा है। बच्चे के प्री-मेच्याेर होने, गर्भवती में रक्त की कमी या अन्य बीमारी होने के कारण कुछ ऐसी स्थिति सामने आ रही है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से बनाए गए अधिकांश शहरी स्वास्थ्य केंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर का नाम दिया गया है। जागरण पड़ताल की गई तो पता चला कि कई डिलीवरी हट में बिस्तर कम हैं और गर्भवती अधिक संख्या में आती हैं। ऐसे में गर्भवती को परेशानी झेलनी पड़ती हैं, मगर जिम्मेदार सुधार नहीं कर पा रहे हैं। डिलीवरी के बाद एक ही बिस्तर पर दो महिलाओं को जगह दी जाती है।
डबुआ कॉलोनी में चार बिस्तर और महीने भर में होती हैं 100 से अधिक डिलीवरी
बात करते हैं डबुआ कॉलोनी के आयुष्मान आरोग्य केंद्र की। यहां प्रसूति विभाग में चार बिस्तर हैं और महीने भर में 100 से अधिक डिलीवरी होती हैं। कई बार डिलीवरी के बाद चार जच्चा-बच्चा को एक ही बेड ही पर जगह दी जाती है।
ऐसे में संक्रमण का जोखिम रहता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस मामले में गंभीर नहीं हैं। इस केंद्र में महिला रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। नर्सिंग अधिकारी के बूते ही डिलीवरी हट चल रही है। अन्य डिलीवरी हट की स्थिति भी कुछ ऐसे ही है।
एसी नगर के आयुष्मान केंद्र का हाल
एसी नगर के आयुष्मान मंदिर परिसर में सफाई नहीं है। दिन भर बच्चे खेलते रहते हैं। अभी यहां डिलीवरी हट नहीं हैंं। गर्भवती आती हैं तो प्रसव पूर्व होने वाली जांच की जाती है। डिलीवरी के समय नागरिक अस्पताल भेज दिया दिया जाता है। यहां कोई महिला डाक्टर नहीं है।
अलग-अलग केंद्रों से रेफर की गई महिलाएं
नरयाला गांव निवासी सुरजीत अपनी गर्भवती पत्नी शालिनी को छांयसा के स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए थे। वहां से शालिनी को नागरिक अस्पताल रेफर कर दिया गया। ऐसे ही त्रिखा कालाेनी निवासी माएना पहले सेक्टर तीन के सरकारी अस्पताल गईं थी।
वहां उन्हें भर्ती नहीं किया गया। बाद में नागरिक अस्पताल भर्ती हुई। पल्ला गांव निवासी प्रतिमा अपनी बेटी रूपम को गर्भावस्था में पहले पल्ला स्वास्थ्य केद्र लेकर गईं थीं। रूपम में रक्त की कमी को देखते हुए नागरिक अस्पताल में रेफर कर दिया गया। गर्भवतियों के स्वजन ने कह कि डिलीवरी हट में सुविधाएंं बढ़नी चाहिए।
जिला नागरिक अस्पताल का एक महीने का रिकॉर्ड
- 709 जांच कराने आईं गर्भवती
- 303 डिलीवरी हुईं
- 28 दूसरे केंद्रों से रेफर होकर जिला नागरिक अस्पताल आईं
- 16 नागरिक अस्पताल से दिल्ली रेफर की गईं महिलाएं
जिला नागरिक अस्पताल परिसर में 162 करोड़ रुपये की लागत से मदर एंड चाइल्ड केयर यूनिट की इमारत बन रही है। इसके चालू होने से जच्चा-बच्चा को बड़ी राहत मिलेगी। नागरिक अस्पताल से रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर किसी स्वास्थ्य केंद्र से जच्चा-बच्चा को रेफर करना पड़ा तो सरकारी एंबुलेंस से उन्हें नागरिक अस्पताल लाया जाएगा। यहां महिला और बच्चों के लिए अलग से आइसीयू बनाया जाएगा।
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-डॉ. एमपी सिंह, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी |