
क्रिप्टोकरेंसी अब रियल मनी गेमिंग (RMG) की दुनिया में घुसपैठ कर रही हैं। भारत में खिलाड़ी नियमों से बचने के लिए नये-नये रास्ते तलाश रहे हैं और अब वे कैश की जगह क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे कुराकाओ (Curacao), जो दक्षिण कैरेबियन के एक छोटे द्वीप में रजिस्टर्ड ऑफशोर बुकमेकर्स के साथ बेटिंग कर रहे हैं। यहां वे पोकर, रमी, क्रिकेट और फुटबॉल जैसे गेम्स में दांव लगाते हैं। खिलाड़ी मानते हैं कि क्रिप्टो के जरिए यह तरीका बैंकिंग चैनल्स से बचने और ट्रांजेक्शन ट्रेल मिटाने का आसान उपाय है।भारत में ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग पर बैन और बैंकों की सख्ती के कारण खिलाड़ी अब वैकल्पिक रास्ते ढूंढ रहे हैं। पहले बहुत कम लोग क्रिप्टो के जरिए बेटिंग करते थे, लेकिन अब यह चलन बढ़ रहा है। खासकर ऐसे लोग जो बड़े दांव लगाते हैं और क्रिप्टो हासिल करने में सक्षम हैं, वे अब इस विकल्प को आजमा रहे हैं। उनके लिए यह दांव सिर्फ गेमिंग का नहीं बल्कि क्रिप्टो की कीमतों पर भी लग रहा है। यानी यह एक तरह का डबल फायदा है।टेक्नोलॉजी और गेमिंग लॉयर जय सैता के मुताबिक, “कई भारतीय विदेशी क्रिप्टो वॉलेट्स के जरिए पेमेंट और विदड्रॉअल कर रहे हैं, जिससे ट्रांजेक्शन्स को ट्रैक करना लगभग असंभव हो गया है। इससे मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी के बड़े खतरे पैदा हो रहे हैं।” जय सैता कहते हैं कि ऑनलाइन गेमिंग (रेगुलेशन) एक्ट 2025 के लागू होने के बाद से, जब भारत की ज्यादातर लीगल RMG कंपनियों ने ऑपरेशन रोक दिए, तो विदेशी वेबसाइट्स ने अपने प्लेटफॉर्म को और आक्रामक तरीके से प्रमोट करना शुरू किया।कुराकाओ, जो नीदरलैंड्स के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, 2023 तक लचीले लाइसेंसिंग सिस्टम के कारण विदेशी गेमिंग और क्रिप्टो कैसिनो कंपनियों के लिए पसंदीदा ठिकाना बन गया। यहां “सस्ता, तेज़ और आसान लाइसेंसिंग रूट” मिलने से कई कंपनियों ने बेस बनाया। हालांकि ये कंपनियां अपने देश के कानूनों के तहत काम करती हैं, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह कानूनी ग्रे एरिया है।ज्यादातर भारतीय खिलाड़ी USDT (एक स्टेबलकॉइन जो अमेरिकी डॉलर से जुड़ा है) ब्लैक मार्केट से खरीदते हैं। एक क्रिप्टो एक्सचेंज अधिकारी ने बताया, “जैसे हवालातंत्र विदेशी मुद्रा में काम करता है, वैसा ही क्रिप्टो के लिए भी एक ब्लैक मार्केट है। खिलाड़ी नकद देकर थोड़े प्रीमियम पर क्रिप्टो लेते हैं और फिर उसे कई निजी वॉलेट्स में ट्रांसफर करते हैं ताकि फेक USDT यानी ‘फ्लैश कॉइन’ से बच सकें।” भारतीय एक्सचेंज प्लेटफॉर्म्स से सीधे प्राइवेट वॉलेट में क्रिप्टो निकालना मुश्किल है क्योंकि ऐसे ट्रांजेक्शन्स को फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) को रिपोर्ट किया जाता है।ऑफशोर RMG साइट्स इन नियमों से मुक्त हैं। इनमें से एक वेबसाइट कहती है, “डिजिटल करेंसी अन्य पेमेंट ऑप्शन्स से अलग है क्योंकि इसमें किसी थर्ड पार्टी इंटरफेरेंस की चिंता नहीं होती। यह सबसे तेज़ और किफायती तरीका है।” वे यह भी दावा करते हैं कि “क्रिप्टो ट्रांजेक्शन ज्यादा सुरक्षित और गुमनाम होते हैं, इसलिए यह यूजर्स के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं।”जय सैता का कहना है कि सरकार को ऑनलाइन मनी गेमिंग पर पूर्ण प्रतिबंध की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “इस बैन से न तो बेटिंग रुकी है और न ही गैरकानूनी वेबसाइट्स पर लगाम लगी है। सरकार को चाहिए कि वह स्किल-बेस्ड रियल मनी गेम्स के लिए एक नियामक ढांचा बनाए ताकि ऐसे ट्रांजेक्शन ट्रैक और टैक्स किए जा सकें।” |