नई दिल्ली। अमेरिका के वेनेजुएला पर हमला करके उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिए जाने के बाद से तेल बाजार में चर्चाओं का बाजार गर्म हो चुका है। कच्चे तेल पर बहस छिड़ गई। चर्चा इस बात पर हो रहा है कि अगर वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका का कब्जा होता है तो इससे किसे फायदा होगा और किसे नुकसान होगा।
ताजा घटनाक्रम भारत के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। क्योंकि ट्रंप टैरिफ की वजह से भारत ने रूस से तेल आयात कम किया है। ऐसे में उसके लिए वेनेजुएला तेल पर अमेरिकी कब्जे (US seizes control of Venezuela’s oil) से दूसरा दरवाजा खुल सकता है। कैसे आइए जानते हैं।
अमेरिकी कार्रवाई को लेकर अलग-अलग देशों के अलग-अलग मत है। कोई अमेरिका के इस कदम को सही तो कोई गलत बता रहा है। भारत ने भी इस पर अपना बयान दिया।
हिंदुस्तान के बयान को पढ़कर ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत ने अपने हितों को देखते हुए सधा हुआ बयान दिया है। बयानबाजी और चर्चाओं के बीच एक चर्चा ये भी हो रही है कि वेनेजुएला के मुकेश अंबानी को सीधा फायदा हो सकता है। लेकिन कैसे आइए जानते हैं।
वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका का हुआ कब्जा तो इन्हें होगा नुकसान
अगर अमेरिका, वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर कब्जा कर लेते है तो इससे रूस, कनाडा, सऊदी अरब, यूरोपियन यूनियन को नुकसान उठाना पडे़गा। रूस तेल और एनर्जी से होने वाली कमाई पर निर्भर है। वह कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है। यूरोपीय और एशियाई बाजारों में उसका तेल बिकता है। वेनेजुएला के तेल की ग्लोबल मार्केट में बाढ़ आने से कीमतों पर दबाव पड़ सकता है और रूस का मार्केट शेयर और प्राइसिंग पावर कम हो सकती है।
सऊदी अरब जो ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (ओपेक) का सबसे बड़ा प्रोड्यूसर को रणनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, अगर वेनेजुएला का तेल जोरदार तरीके से ग्लोबल मार्केट में वापस आता है।
अगर वेनेजुएला का कच्चा तेल अमेरिकी बाजार में फिर से तरजीही पहुंच हासिल कर लेता है, तो कनाडा को बड़ा नुकसान हो सकता है।
AFPM के अनुसार, कनाडा अमेरिका को तेल सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है, जिसने पिछले साल अमेरिकी कच्चे तेल के इंपोर्ट का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा सप्लाई किया था। इस सप्लाई का अधिकतर हिस्सा अल्बर्टा के ऑयल सैंड्स से आता है और इसे मिडवेस्ट और गल्फ कोस्ट के साथ-साथ रिफाइनरियों में दक्षिण की ओर भेजा जाता है।
मुकेश अंबानी की रिलायंस को क्यों होगा फायदा?
अगर वेनेजुएला का कच्चा तेल भारतीय बाजार में वापसी करता है तो इसका सीधा फायदा मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज को होगा।कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स फर्म केप्लर के अनुसार, वेनेजुएला का कच्चा तेल ज्यादातर भारी से बहुत भारी होता है। इसमें सल्फर की मात्रा अधिक होती है। इस तेल को रिफाइन करने के लिए हाई टेक्नोलॉजी की जरूरत पड़ती है जो भारत में रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा के पास है।
हाई सल्फर युक्त कच्चे तेल को रिफाइन करने के हिसाब से ही रिलायंस का जामनगर कॉम्प्लेक्स (Reliance Industries Jamnagar complex) को डिजाइन किया गया है। अगर भारत को वेनेजुएला से कच्चे तेल की सप्लाई फिर से शुरू होती है, तो रिलायंस खरीदारी बढ़ा सकती है। और तेल को रिफाइन करके रिलायंस मोटा पैसा कमा सकता है।
ICRA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और को-ग्रुप हेड, कॉर्पोरेट रेटिंग्स, प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि वेनेजुएला का कच्चा तेल भारी और खट्टा होता है, इसलिए यह सस्ता है। भारतीय कंपनियों ने वेनेजुएला के तेल और गैस ब्लॉक में निवेश किया है, लेकिन प्रतिबंधों के कारण डिविडेंड पेमेंट और डेवलपमेंट रुका हुआ है। अगर अमेरिका प्रतिबंध हटाता है तो इससे भारतीय कंपनियों को मोटा डिविडेंड मिल सकता है।
कभी रिलायंस थी सबसे बड़ी खरीदार
केप्लर के डेटा के अनुसार, 2013 और 2016 के बीच वेनेजुएला से भारतीय कच्चे तेल का इंपोर्ट मजबूत था, जो लगभग 400 kbd से बढ़कर लगभग 500 kbd हो गया था। इस दौरान रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी सबसे बड़ी खरीदार थी, उसके बाद नायरा की वाडिनार रिफाइनरी (तब एस्सार ऑयल) थी, जबकि न्यू मैंगलोर रिफाइनरी ने कम मात्रा में इंपोर्ट किया।
2017 के बाद इंपोर्ट में गिरावट शुरू हुई, 2018 में यह लगभग 540 kbd पर पहुंच गया, और अमेरिकी प्रतिबंध लगने के बाद 2021 तक यह शून्य हो गया।
अक्टूबर 2023 में, अमेरिका ने वेनेजुएला के पेट्रोलियम सेक्टर पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी और 6 महीने के लिए तेल खरीद की छूट दी। इससे RIL और कुछ अन्य भारतीय रिफाइनरियों ने वेनेजुएला से तेल इंपोर्ट फिर से शुरू कर दिया। हालांकि, वेनेजुएला में स्वतंत्र और निष्पक्ष राष्ट्रपति चुनावों में धांधली की वजह अमेरिका ने छूट आगे नहीं बढ़ाई।
इसके बाद 2025 में ट्रंप ने वेनेजुएला से तेल खरीदने पर अधिक टैरिफ लगाने की धमकी दी। कई महीनों से भारत में वेनेजुएला से कोई तेल इंपोर्ट नहीं हुआ है। |
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