शिमला के बागवानों द्वारा सेब के पौधों पर जमाई गई कृत्रिम बर्फ। जागरण
रोहित शर्मा, शिमला। हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से मौसम की बेरुखी बनी हुई है, हिमपात न होने के कारण सेब की फसल के लिए चिलिंग ऑवर्स पूरे नहीं हो पाए हैं। सेब बागवानी के लिए वर्षा व हिमपात बहुत जरूरी हैं। ऐसे में शिमला जिले के कई क्षेत्रों में बागवान सेब के पौधों पर कृत्रिम रूप से बर्फ जमा रहे हैं। हालांकि ऐसा करना बागवानों को महंगा भी पड़ सकता है।
प्रदेश में लगभग तीन माह से वर्षा व हिमपात नहीं हुआ है। इसके कारण प्रदेश के निचले व मध्यम इलाकों में अभी तक चिलिंग आवर्स की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। यही कारण है कि बागवान चिलिंग आवर्स पूरे करने के लिए अलग-अलग प्रयोग कर रहे हैं।
वर्षा व हिमपात न होने के कारण रुके काम
वर्षा व हिमपात न होने से बगीचों के काम रुक गए हैं। हालांकि बागवानों ने बगीचों में प्रूनिंग करने का काम शुरू कर दिया है, लेकिन खाद डालने, तौलिए बनाने (पौधे के चारों ओर गुड़ाई), नए पौधे लगाने के लिए गड्ढे बनाने का काम शुरू नहीं हो पाया है। वर्षा न होने के कारण जमीन में नमी न के बराबर है। इसके कारण यह कार्य पूरे नहीं हो पाए हैं।
इतने चिलिंग ऑवर्स जरूरी
चिलिंग आवर्स की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही पौधा सुप्तावस्था यानी डोरमेंसी में जाता है। पौधे और फल के उचित विकास के लिए पौधे का सुप्तावस्था में जाना जरूरी है। सेब की रायल किस्म के लिए 800 से एक हजार चिलिंग आवर्स की जरूरत होती है। अर्ली वैरायटी के पौधों के लिए 600 से 800 चिलिंग आवर्स होना जरूरी है। इसके अलावा स्टोन फ्रूट के लिए इससे भी कम चिलिंग आवर्स की आवश्यकता होती है। चेरी के लिए 500, आड़ू के लिए 300 से 400 और खुमानी व प्लम के लिए इससे भी कम चिलिंग आवर्स जरूरी होते हैं।
इस तरह जमाई जा रही बर्फ
सेब के बगीचों में रात के समय केवल टहनियों पर कृत्रिम बर्फ जमाई जाती है। जब रात को तापमान शून्य डिग्री या उससे नीचे चला जाता है, तो बागवान स्प्रिंकलर या पाइप के माध्यम से लगातार पानी टहनियों पर छोड़ते हैं। यह पानी टहनियों पर गिरने के बाद रात को जमकर बर्फ की परत बना लेता है।
क्या कहते हैं बागवानी विशेषज्ञ
बागवानी विशेषज्ञ डा. एसपी भारद्वाज का कहना है कि इन सभी तरीकों पर पहले कोई अध्ययन नहीं हुआ है। ऐसे में ये चीजें करनी चाहिए या नहीं, यह कह पाना थोड़ा मुश्किल है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से सेब के पौधों को नुकसान पहुंच सकता है। ठियोग क्षेत्र के बागवान कृत्रिम बर्फ जमा रहे हैं।
पौधे को हो सकता है नुकसान
सेब की फसल में चिलिंग ऑवर्स पूरे करने के लिए दिन का औसतन तापमान सात डिग्री सेल्सियस से कम होना चाहिए। कृत्रिम बर्फ जमाने से तापमान बहुत ज्यादा नीचे चला जाता है, जबकि वातावरण का तापमान अधिक रहता है। ऐसी स्थिति में सेब के पौधे के कोमल भाग और नई कलिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इससे पौधों का विकास और अगले वर्ष की फसल प्रभावित हो सकती है।
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