search

वाराणसी में नियमों का उल्लंघन कर बनाई गई थी गंगा पार टेंट सिटी, एनजीटी ने लगाया तगड़ा जुर्माना

LHC0088 Yesterday 12:56 views 285
  

एनजीटी ने भविष्य में गंगा किनारे ऐसी टेंट सिटी की अनुमति न देने का भी आदेश दिया।



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली/वाराणसी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने स्पष्ट किया है कि वाराणसी में गंगा किनारे स्थापित टेंट सिटी 2023 में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते हुए बनाई और चलाई गई थी। एनजीटी ने गुरुवार को गंगा पार रेती में टेंट सिटी के संबंध में एक याचिका पर सुनवाई की, जिसमें आरोप लगाया गया था कि यह टेंट सिटी बिना किसी मंजूरी के बनाई गई थी और इसके कारण गंगा का प्रदूषण बढ़ा है। इसके साथ ही, यह पेड़-पौधों और जीवों को भी नुकसान पहुंचा रही थी।

एनजीटी की बेंच, जिसमें चेयरपर्सन प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल शामिल थे, ने अपनी फाइंडिंग में कहा कि प्रतिवादी प्रवेग कम्युनिकेशन इंडिया लिमिटेड और निरान द टेंट सिटी ने पर्यावरण नियमों और गंगा (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरणों के आदेशों का उल्लंघन करते हुए टेंट सिटी स्थापित की थी। एनजीटी ने यह भी नोट किया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने नवंबर 2023 में टेंट सिटी के संचालन के लिए लगभग 17 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया था, जो कि ग्रीन नियमों के उल्लंघन के कारण था।

ट्रिब्यूनल ने यूपीपीसीबी और उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण विभाग को निर्देश दिया कि वे तीन माह के भीतर जुर्माना वसूल करें। इसके साथ ही, संबंधित राज्य अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया कि गंगा या उसकी सहायक नदियों के किनारे ऐसी किसी भी टेंट सिटी की अनुमति न दी जाए। वाराणसी विकास प्राधिकरण ने गंगा पार टेंट सिटी के लिए दो कंपनियों के साथ अनुबंध किया था, जिसमें बरसात के अलावा अन्य महीनों में इसके संचालन की योजना बनाई गई थी।

2023 में चेत सिंह घाट के सामने टेंट सिटी की स्थापना की गई थी। इसके मलजल के गंगा में जाने और अन्य पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर शिकायतें उठने लगीं, जिसके बाद मामला एनजीटी तक पहुंचा। याचिकाकर्ता ने वकील सौरभ तिवारी के माध्यम से पर्यावरणीय उल्लंघनों का दावा करते हुए एक याचिका दायर की। एनजीटी ने आरोपों की पुष्टि के लिए मार्च 2023 में एक सात सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया। इस समिति ने कई पर्यावरणीय उल्लंघनों का खुलासा किया, जिसके बाद संबंधित कंपनियों पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया।

टेंट सिटी का संचालन 15 जनवरी से 31 मई 2023 तक किया गया था। एनजीटी में मामला लंबित रहने के कारण शासन ने अगले वर्ष टेंट सिटी की स्थापना से हाथ खींच लिए हैं। यह स्पष्ट है कि पर्यावरणीय नियमों का पालन न करने के कारण न केवल गंगा का प्रदूषण बढ़ा है, बल्कि इससे स्थानीय पारिस्थितिकी पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

इस मामले ने यह भी दर्शाया है कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और नियमों का पालन कितना आवश्यक है। यदि इस तरह के उल्लंघनों को समय पर रोका नहीं गया, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। वाराणसी की गंगा, जो न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। एनजीटी के निर्णय ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि पर्यावरण की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसे सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को जिम्मेदारी से कार्य करना चाहिए।
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

410K

Threads

0

Posts

1410K

Credits

Forum Veteran

Credits
147531

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com