बीआरए बिहार विश्वविद्यालय की यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग की अनुशंसा पर पिछले दिनों विभिन्न विषयों में नियुक्त सहायक प्राध्यापकों के चयन में कई गड़बड़ियां उजागर हो रही हैं।
संबद्ध कालेजों ने मानकों का पालन किए बगैर ही रेवड़ियों की तरह अभ्यर्थियों को अनुभव प्रमाण पत्र बांटे हैं। इसमें से कइयों का चयन विभिन्न विश्वविद्यालयों में भी हुआ है। अभ्यर्थियों को जारी किए जाने वाले अनुभव प्रमाण पत्र में अवधि का विवरण नहीं दिया गया है।
इसमें यह नहीं बताया गया है कि अभ्यर्थी ने महाविद्यालय में किस तिथि से किस तिथि तक अध्यापन का कार्य किया है। महाविद्यालयों की ओर से विश्वविद्यालय को दी जाने वाली रिपोर्ट में नियुक्ति की तिथि का तो वर्णन किया गया है लेकिन सेवा से हटने की बात उल्लेखित नहीं है।
चर्चा है कि बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के एक कालेज में भी ऐसे अभ्यर्थियों की नियुक्ति का संदेह है। शैक्षणिक अनुभव के आधार पर प्रति वर्ष दो अंक के आधार पर अधिकतम 10 अंक का वेटेज मिलता है। दूसरी ओर कई कालेजों से मांगी गई जानकारी अब तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
संबद्ध कालेजों से जारी होने वाले जिन विषयों में अनुभव प्रमाण पत्र नहीं था उसमें भी चयन का संदेह है। किसी - किसी अभ्यर्थी की तो नियुक्ति के चार से पांच दिनों के बाद ही सेवा संपुष्टि कर दी गई।
कुछ अभ्यर्थियों के चयन में बीएड के अध्यापन को भी वेटेज दिया गया है। जब मामले को लेकर एक अभ्यर्थी ने आरटीआई के तहत इसकी जानकारी मांगी तो बताया गया कि बीएड कालेज में अध्यापन के अनुभव को नियुक्ति में वेटेज नहीं दिया जाएगा।
पिछले दिनों पदस्थापित शिक्षकों के दस्तावेज की हो रही जांच
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में पिछले दिनों विभिन्न विषयों में पदस्थापित शिक्षकों के दस्तावेज की जांच की जा रही है। इसमें कई विषयों में अभ्यर्थयों के दस्तावेज में कमी और मानकों को पूरा नहीं करने पर भी चयन का संदेह है।
विश्वविद्यालय की ओर से जांच की प्रक्रिया चल रही है। दूसरी ओर पिछले दिनों आयोग की अनुशंसा पर भेजे गए अभ्यर्थयों की काउंसिलिंग हुई है। इस आधार पर कई अभ्यर्थियों के दस्तावेज में कमी है। |
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