दिल्ली में पानी का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। कहीं दूषित तो कहीं पानी ही नहीं।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राजधानी में दूषित पेयजल की समस्या की जड़ जमीन के नीचे दबी दशकों पुरानी पाइपलाइनें हैं। दिल्ली जल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार राजधानी की 15,600 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन में से 2,800 किलोमीटर यानी करीब 18 प्रतिशत लाइनें 30 वर्ष से अधिक पुरानी हो चुकी हैं।
कई इलाकों में पाइपलाइन की उम्र 50 से 80 साल तक पहुंच गई है, जिससे घरों तक पहुंचने वाला पानी अक्सर दूषित हो जाता है। इस मुद्दे पर दिल्ली हाई कोर्ट और एनजीटी कई बार कड़ी टिप्पणी कर चुके हैं।
दिल्ली अपनी लगभग 90 प्रतिशत पेयजल जरूरतों के लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है, इसके बावजूद जल उपचार संयंत्रों से निकलने वाले पानी का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा रिसाव, चोरी और तकनीकी खामियों के कारण उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचता। कई जगह पेयजल लाइन के साथ सीवर लाइन बिछी होने से पानी दूषित हो रहा है।
कोर्ट की फटकार, टैंकर माफिया की चांदी
योजना विहार, आनंद विहार, जनकपुरी सहित कई इलाकों में दूषित पानी आपूर्ति के मामले अदालत तक पहुंचे हैं। सरकार का दावा है कि 93 प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन है, लेकिन संगम विहार, देवली जैसी अनधिकृत कॉलोनियों और झुग्गियों में आज भी पानी की नियमित आपूर्ति नहीं है। इसी का फायदा उठाकर टैंकर माफिया लोगों को चोरी का पानी बेच रहा है।
भ्रष्टाचार, फंड संकट और रखरखाव में देरी
बीते वर्षों में आम आदमी पार्टी सरकार और केंद्र सरकार के बीच विवाद तथा दिल्ली जल बोर्ड में भ्रष्टाचार के आरोपों से स्थिति और बिगड़ी। वर्ष 2023-24 में वित्त विभाग द्वारा फंड जारी करने में देरी हुई, जिससे रखरखाव कार्य ठप पड़ गया। नई सरकार बनने के बाद फंडिंग तो शुरू हुई, लेकिन जमीनी सुधार अब भी धीमा है।
14 साल बाद शुरू हुआ बड़ा ओवरहॉल
दिल्ली के जर्जर जल नेटवर्क को सुधारने के लिए वर्ष 2011 में प्रस्तावित चंद्रावल और वजीराबाद कमांड एरिया परियोजनाएं 14 साल तक टेंडर और फंडिंग में देरी के कारण अटकी रहीं। प्रशासनिक अड़चनों से तंग आकर एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने एक समय फंडिंग वापस भी ले ली थी। 2025 में नई सरकार की पहल पर फंड बहाल हुआ और टेंडर प्रक्रिया पूरी हो सकी।
कहां-कहां बदलेगा सिस्टम
चंद्रावल कमांड एरिया (96 वर्ग किमी) में
- 1,044 किमी नई पाइपलाइन।
- 21 भूमिगत जलाशय (UGR)
- करोल बाग, पटेल नगर, मॉडल टाउन, कश्मीरी गेट, पहाड़गंज और जामा मस्जिद जैसे इलाके शामिल।
वजीराबाद कमांड एरिया (123 वर्ग किमी) में
- 1,700 किमी नई पाइपलाइन।
- 14 भूमिगत जलाशय।
- बुराड़ी, रोहिणी, जहांगीरपुरी और पीतमपुरा जैसे क्षेत्र कवर होंगे।
पानी के लिए क्या हुआ और क्या होना है
- 2–3 साल में: 7,000 किलोमीटर पाइपलाइन बदली जाएंगी, यह फेज-1 लक्ष्य है।
- 7–8 साल में: पूरे दिल्ली जल नेटवर्क का ओवरहॉल पूरा होगा।
- बीते 11 महीनों में 262 नए ट्यूबवेल चालू हुए।
- प्रतिदिन 90 लाख गैलन अतिरिक्त पानी सप्लाई में जोड़ा गया।
- 200 किमी नई पाइपलाइन का काम शुरू हो चुका है।
- पानी की बर्बादी रोकने के लिए 1,300 से अधिक डिस्ट्रिक्ट मीटर्ड एरिया (DMA) बनाए जाएंगे।
दूषित सैंपल और आरओ से बढ़ती बर्बादी
22–26 दिसंबर की जल गुणवत्ता रिपोर्ट में 7,129 नमूनों में से 100 असंतोषजनक पाए गए। खराब सैंपल मानसरोवर पार्क, पालम डीडीए फ्लैट्स, द्वारका सेक्टर-13, उत्तम नगर, बुराड़ी, जोनापुर और घिटोरनी जैसे इलाकों से मिले।
पाइपलाइन में गड़बड़ी के कारण लोग आरओ का सहारा ले रहे हैं। दिल्ली में करीब 80 लाख घरेलू आरओ लगे हैं, जिनसे रोज़ाना 4 करोड़ लीटर से अधिक पेयजल बर्बाद हो रहा है।
सरकार की योजनाएं
- 2025-26 के बजट में जल व सीवर के लिए 9,000 करोड़ रुपये।
- आईआईटी कानपुर से समझौता-जल प्रबंधन सुधार के लिए।
- 68 विधानसभा क्षेत्रों को 734 करोड़ रुपये।
- अमृत-1 योजना: 800 करोड़ खर्च कर 200 किमी पाइपलाइन बदली गई।
- अमृत-2 योजना: 2,880 करोड़ से अनधिकृत कॉलोनियों व झुग्गियों में नेटवर्क मजबूत किया जाएगा।
दिल्ली को अभी कई साल तक ज़मीन के नीचे दबी 50–80 साल पुरानी पाइपलाइनों पर निर्भर रहना होगा, लेकिन 14 साल बाद शुरू हुआ यह ओवरहॉल राजधानी के लिए स्वच्छ पेयजल की ओर एक बड़ी शुरुआत माना जा रहा है।
एक नजर में समझें दिल्ली में पाइपलाइन संकट
नेटवर्क का फैलाव: दिल्ली जल बोर्ड के अंतर्गत पूरे शहर में कुल 16,634 किमी लंबा जल पाइपलाइन नेटवर्क फैला हुआ है।
पुरानी व्यवस्था का खतरा: करीब 5,253 किमी (लगभग 32%) पाइपलाइनें 30 साल से ज्यादा पुरानी हो चुकी हैं, जो सिस्टम में गंभीर जर्जरता को दर्शाता है।
नई बनाम पुरानी पाइपलाइन: नेटवर्क का लगभग 48% हिस्सा 20 साल से ऊपर की उम्र का है, जबकि केवल 27.5% पाइपलाइनें ही पिछले 10 वर्षों में डाली गई हैं।
छोटी पाइपों का नेटवर्क है बड़ा: 100 मिमी व्यास की पाइपलाइनें लगभग 11,320 किमी तक फैली हैं — यानी पूरे नेटवर्क का करीब 68%।
सबसे ज्यादा जोखिम में कौन-सी पाइप: इन 100 मिमी पाइपों में से 3,350 किमी से अधिक पाइपलाइनें 30 वर्ष से पुरानी हैं, जिससे यही रिसाव और गंदे पानी की सबसे बड़ी वजह बन रही हैं।
मध्यम आयु, बढ़ता रखरखाव: करीब 4,058 किमी (24%) पाइपलाइनें 10–20 वर्ष पुरानी श्रेणी में हैं, जो जल्द ही भारी मेंटेनेंस की मांग करेंगी।
बड़े व्यास की पाइप- कम, लेकिन बेहद अहम: 600 मिमी से बड़ी पाइपलाइनें संख्या में कम हैं, पर ये मुख्य ट्रंक लाइनें हैं — इनमें खराबी होने पर बड़े इलाकों की सप्लाई एक साथ ठप हो सकती है।
जमीनी हकीकत
- हर दिन रिसाव और पाइप फटना: जर्जर नेटवर्क की वजह से शहर में बार-बार लीकेज और पाइप फटने की घटनाएं हो रही हैं, जिससे पानी की बर्बादी और प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा है।
- गंदे पानी को लेकर जनप्रतिनिधियों की शिकायतें: विधायकों ने अपने क्षेत्रों में गंदे पानी की लगातार शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिनका सीधा संबंध पुरानी पाइपलाइनों से जोड़ा गया है।
- उपेक्षा का बोझ: सरकार का कहना है कि वर्षों तक अनदेखी, फैसलों में देरी और पिछली सरकारों द्वारा समय पर अपग्रेड न करने के कारण यह स्थिति बनी।
- अधर में लटकी मरम्मत योजनाएं: चंद्रावल और वजीराबाद कमांड क्षेत्रों की पाइपलाइन सुधार परियोजनाएं टेंडर बार-बार रद होने से वर्षों तक अटकी रहीं।
- सबसे बड़ा नुकसान: गैर-राजस्व जल: पुरानी पाइपलाइनों के कारण दिल्ली में 55% तक पानी बिना राजस्व के बह जाता है, जिससे असली उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाला पानी काफी कम हो जाता है।
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