पुलिसिया पत्नी और पुरोहित पति के रिश्तों में दरार (AI Generated Image)
डिजिटल डेस्क, भोपाल। भोपाल के कुटुंब न्यायालय में इन दिनों ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जो रिश्तों की नींव और बदलते सामाजिक मूल्यों पर गहरे सवाल खड़े कर रहे हैं। जिन पतियों ने अपने सीमित साधनों और कम शिक्षा के बावजूद पत्नियों के सपनों को साकार करने के लिए खुद को पीछे रखा, वही पति आज अपनी ही शादी में ‘अयोग्य’ ठहराए जा रहे हैं।
ऐसे ही एक मामले में पति पेशे से पुरोहित हैं। धोती-कुर्ता, शिखा और पारंपरिक जीवनशैली ही उनकी पहचान रही है। उन्होंने अपनी पत्नी को पहले स्नातक कराया, फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई। दिन-रात की मेहनत रंग लाई और पत्नी सब-इंस्पेक्टर बन गई। लेकिन वर्दी पहनते ही पति का वही संस्कार, वही रहन-सहन पत्नी को खटकने लगा।
पत्नी ने काउंसलिंग के दौरान कहा कि पति का ‘स्टेटस’ अब उससे मेल नहीं खाता। धोती-कुर्ता पहनने और शिखा रखने वाले पति के साथ सार्वजनिक स्थानों पर जाना उसे शर्मिंदगी देता है। यहां तक कह दिया कि पति में इतनी हैसियत नहीं कि वह उसे अपने साथ रख सके। यह सुनते ही पति का मन टूट गया, आंखें नम हो गईं। फिर भी उसने कहा— “मैं जबरदस्ती उसे अपने साथ नहीं रख सकता, लेकिन छह साल की इस शादी को बचाने की आखिरी कोशिश जरूर करूंगा।”
जब सफलता ने ही रिश्ते तोड़ दिए
ऐसा ही एक और मामला राजधानी के पास स्थित एक गांव से सामने आया है। किसान पति ने खेतों की कमाई से पत्नी की पढ़ाई कराई—स्नातक, स्नातकोत्तर और बीएड तक। भोपाल में रहकर कोचिंग दिलवाई, ताकि पत्नी अपने पैरों पर खड़ी हो सके। मेहनत रंग लाई और पत्नी सरकारी स्कूल में शिक्षिका बन गई। लेकिन नौकरी मिलते ही उसने किसान पति के साथ रहने से इनकार कर दिया।
पति का दर्द छलक उठा- “शादी के वक्त वह कुछ नहीं करती थी। मैंने हर जरूरत पूरी की, पढ़ाया-लिखाया, आगे बढ़ाया। आज जब वह सफल हो गई, तो मेरे साथ रहना उसे मंजूर नहीं।”
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कुटुंब न्यायालय में सामने आ रहे ये मामले सिर्फ तलाक की अर्जी नहीं हैं, बल्कि उन टूटते रिश्तों की कहानी हैं, जहां त्याग, प्रेम और विश्वास की जगह अब ‘स्टेटस’ और ‘सोशल इमेज’ ने ले ली है।
ऐसे दो मामले काउंसलिंग के लिए आए हैं। जिसमें पतियों ने पत्नियों को पढ़ा-लिखाकर ऊंचे पद पर पहुंचाया। अब पत्नियां उनके साथ रहने से इन्कार कर रही है। इन मामलों में दंपती को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया है।
- शैल अवस्थी, काउंसलर, कुटुंब न्यायालय। |
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