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निजी संसाधनों से गेहूं-सरसो की सिंचाई को मजबूर हुए किसान, कागज पर नहर अंतिम छोर तक पहुंचा पानी

cy520520 2026-1-11 16:26:56 views 695
  

निजी संसाधनों से गेहूं-सरसो की सिंचाई को मजबूर हुए किसान



जागरण संवाददाता, अरवल। जिले के किसान इन दिनों काफी परेशान हैं। जनवरी का आधा महीना बीत गया, लेकिन नहरों में पानी नहीं आया। किसानों को निजी संसाधनों के माध्यम से गेहूं व सरसों की सिंचाई करनी पड़ रही है। जिले के मुख्य सोन कैनाल में पानी है, लेकिन उससे जुड़े रजवाहा में पानी नहीं है, जिससे किसानों को गेहूं की सिंचाई में अतिरिक्त खर्च हो रहा है।  

किसान नंदलाल शर्मा, मुकेश कुमार, सतीश कुमार ने बताया कि हमलोगों का खेत आईयरा रजवाहा और परहा वितरणी के किनारे पड़ता है। इस वर्ष गेहूं के पटवन के लिए अबतक पानी नहीं आया है। जिन किसानों के पास मोटर या डीजल पंप सेट है उनको खेतों की सिंचाई करने में आसानी हो रही है लेकिन जिनके पास अपना संसाधन नहीं है।  
प्रति बीघा एक हजार रुपये खर्च

उनको गेहूं की सिंचाई करने में प्रति बीघा एक हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है। किसानों ने कहा कि यहां नहर है पर उसका फायदा किसानों को नहीं मिल पाता है। खरीफ और रबी फसलों की सिंचाई अपने संसाधन के भरोसे ही करनी पड़ती है। यही वजह है किसानों की आय में वृद्धि नहीं हो पाती है।  

इस बाबत पूछने पर सिंचाई विभाग के एसडीओ अजय कुमार ने दावा किया कि जिले की सभी नहरों में अंतिम छोर तक पानी पहुंच गया है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों से बातचीत हुई है कहीं पानी की कमी नहीं है। नहर से ही गेहूं की सिंचाई हो रही है। गेहूं की अंतिम सिंचाई तक विभाग किसानों को पानी उपलब्ध कराएगा।  
नालियों का काला और गंदा पानी बह रहा

वहीं किसानों का कहना है कि आईयारा रजवाहा और परहा वितरणी दोनों नहर में पानी नहीं है, केवल नालियों का काला और गंदा पानी बह रहा है, जिससे पटवन संभव नहीं है।  

किसानों ने कहा कि सिंचाई विभाग के कोई अधिकारी कभी भी नहर की जांच करने नहीं आते हैं। केवल कागज पर ही अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने का दावा करते हैं।
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