करीब 10 वर्षों से अकबरपुर क्षेत्र में गुपचुप तरीके से काम कर रहे थे सोसायटी से जुड़े लोग. Concept Photo
जागरण संवाददाता, कानपुर देहात। गरीब कमजोर वर्ग की कन्याओं की शादी में सहयोग के साथ ही लोगों को कंबल वितरित करने और भोज कार्यक्रम के द्वारा सोसायटी से जुड़े लोग करीब 10 वर्ष से अकबरपुर के ग्रामीण क्षेत्र में गुपचुप तरीके से सक्रिय थे। कोरोना काल के दौरान भी लोगों की मदद कर आमजन में पकड़ बनाई थी। इसके बाद अकबरपुर कस्बे में किराये के भवन में नवकांति सोसायटी का बोर्ड लगा प्रशिक्षण की आड़ में मतांतरण का जाल बुना गया।
अकबरपुर में संचालित नवकांति सोसायटी क्षेत्र में करीब 10 वर्ष से सक्रिय थी। मछली पट्टनम आंध्र प्रदेश में पंजीकृत नवकांति सोसायटी ने अकबरपुर कस्बे में किराये के भवन में कोराना काल के दौरान ही प्रशिक्षण केंद्र खोलकर खुले तौर पर काम शुरू किया। यहां महिलाओं युवतियों को सिलाई, कढ़ाई का प्रशिक्षण देने के साथ ही प्रार्थना सभा का आयोजन भी किया जाता था।
सोसायटी से जुड़े सदस्य करीब 10 वर्ष से जिले में गुपचुप तरीके से काम कर रहे थे। गरीब कन्याओं के विवाह में उपहार, आर्थिक सहयोग के साथ ही, कंबल वितरण व भोज कार्यक्रम कर लोगों तक अपनी पकड़ बनाई और ग्रामीण क्षेत्र में अपने एजेंट तैयार कर लोगों को प्रार्थना सभा तक लाने का प्रयास किया जा रहा था।
वहीं कोविड काल के दौरान भी सोसायटी से जुड़े सदस्यों ने लोगों का सहयोग कर अपनी पकड़ को मजबूत किया। कोरोना काल में लोगों की नौकरी जाने पर नवकांति सोसायटी का बोर्ड लगा महिलाओं, युवतियों को प्रशिक्षण देने की आड़ में मतांतरण का खेल शुरू किया गया। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र में काम करने वाले एजेंटों को मासिक 6000 से 10 हजार रुपये तक शुल्क भी दिया जा रहा था, जबकि प्रार्थना सभा में आने वाले लोगों को चाय-नाश्ते के साथ ही 200 रुपये दिए जाते थे।
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