search

झारखंड में लापता बच्चों की बरामदगी को लेकर सड़क पर उतरे लोग, पूरा इलाका रहा बंद; पुलिस से हुई झड़प

deltin33 Yesterday 18:26 views 623
  

लापता मासूम अंश और अंशिका। (फाइल फोटो)



जागरण संवाददाता, रांची। धुर्वा के मल्हार कोचा इलाके से दो जनवरी को लापता हुए मासूम अंश और अंशिका की अब तक सकुशल बरामदगी नहीं होने से पूरे धुर्वा क्षेत्र में गहरा आक्रोश और बेचैनी का माहौल है।

बच्चों की तलाश में पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद कोई ठोस सफलता नहीं मिलने के कारण स्थानीय लोगों का सब्र जवाब देने लगा है।

इसी आक्रोश के तहत रविवार को धुर्वा क्षेत्र पूरी तरह बंद रहा। इस बंदी का असर इतना व्यापक था कि धुर्वा औद्योगिक क्षेत्र का हृदयस्थल कहे जाने वाले जगन्नाथपुर चौक से लेकर सेक्टर-2 मार्केट, सेक्टर-3 मार्केट, धुर्वा बस स्टैंड, शर्मा मार्केट, जेपी मार्केट और साप्ताहिक रूप से लगने वाला सेक्टर-2 का रविवार बाजार भी पूरी तरह ठप रहा।

बंदी के दौरान छोटी-बड़ी सभी दुकानें, ठेले, चाय-पान की गुमटियां तक बंद रहीं। अधिकांश दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद रखीं, जबकि कुछ दुकानों के खुलने पर आंदोलनकारी लोगों ने उन्हें बंद रखने की अपील की। कुछ स्थानों पर जबरन दुकान बंद कराने की कोशिश भी हुई, जिस पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

पुलिस द्वारा खदेड़े जाने पर ऐसे लोग वहां से भाग गए। पूरे क्षेत्र में दिन भर सन्नाटा पसरा रहा और सड़कों पर आम दिनों की तुलना में काफी कम आवाजाही देखने को मिली।
पांच हजार से अधिक मोबाइल नंबरों का डिटेल खंगाल रही है पुलिस

बच्चों की गुमशुदगी को लेकर पुलिस भी पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया। रांची जिले के सिटी एसपी, ग्रामीण एसपी और ट्रैफिक एसपी के साथ-साथ शहर के सभी थानों के इंस्पेक्टर और थाना प्रभारी धुर्वा थाना में कैंप किए हुए हैं। बच्चों की सकुशल वापसी को लेकर पुलिस की गतिविधियां लगातार जारी हैं।

ग्रामीण एसपी स्वयं मोबाइल ट्रैकिंग से जुड़े सभी नंबरों की जांच कर रहे हैं और जो पुलिस टीमें बाहर भेजी गई हैं, उनकी भी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। पल-पल की जानकारी लेकर वे सभी टीमों को बारी-बारी से आवश्यक निर्देश दे रहे हैं।

पुलिस जांच की व्यापकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक करीब पांच हजार मोबाइल नंबरों और लगभग दो हजार सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच की जा रही है। जिस दिन दोनों बच्चे लापता हुए थे, उस दिन इलाके में साप्ताहिक बाजार लगा था।

बाजार के कारण क्षेत्र में लोगों की आवाजाही अधिक थी और बड़ी संख्या में मोबाइल फोन सक्रिय थे। काल डंप निकालने पर हजारों मोबाइल नंबर एक्टिव पाए गए, जिसके चलते पुलिस को बड़े पैमाने पर मोबाइल नंबरों की छानबीन करनी पड़ रही है। तकनीकी जांच के साथ-साथ मानवीय सूचनाओं को भी गंभीरता से खंगाला जा रहा है।
दो टीम लौटी, तीन टीम हुई रवाना

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की विशेष टीमें राज्य से बाहर भी भेजी गई हैं। तीन टीमें भुवनेश्वर, जयपुर और दिल्ली के लिए रवाना हुई हैं, जहां संभावित ठिकानों और संदिग्ध गतिविधियों की जांच की जाएगी।

वहीं, बिहार और पश्चिम बंगाल भेजी गई दो टीमें जांच के बाद खाली हाथ लौट आई हैं। इसके बावजूद पुलिस का दावा है कि जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है और जल्द ही कोई अहम सुराग हाथ लग सकता है।
मां की स्थिति गंभीर

इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू बच्चों के परिवार की हालत है। दोनों बच्चों की मां नीतू की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। वह अपने छोटे बच्चे के साथ सुबह से रात तक पलंग पर ही पड़ी रहती है और अब बोल पाने की स्थिति में भी नहीं है।

घर में जो भी उनसे मिलने जाता है, उसे देखकर वह फूट-फूट कर रोने लगती है। मां का यह हाल देखकर परिवार के अन्य सदस्यों और मोहल्ले वालों की आंखें भी नम हो जाती हैं।

बच्चों की दादी की भी स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि जिसने भी उनके पोते-पोतियों को ले गया है, अगर पैसे की जरूरत है तो वह अपना घर तक बेचकर दे देंगी।

उनका कहना है कि बच्चों के वापस आने के बाद वह पूरे परिवार के साथ मनेर चली जाएंगी और फिर कभी रांची में नहीं रहेंगी। उनका यह बयान परिवार की टूट चुकी मानसिक स्थिति और गहरे सदमे को साफ तौर पर दर्शाता है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री पहुंचे बच्चों के घर

बच्चों की तलाश और परिवार को ढांढस बंधाने के लिए कई सामाजिक और राजनीतिक लोग भी आगे आ रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय भी बच्चों के घर पहुंचे और घरवालों से मुलाकात की।

उन्होंने फोन पर एसएसपी से बातचीत कर बच्चों को जल्द से जल्द बरामद करने की मांग की। एसएसपी ने उन्हें आश्वासन दिया कि पुलिस की कई टीमें इस मामले पर लगातार काम कर रही हैं और जल्द ही कोई ठोस नतीजा सामने आएगा।
दो जनवरी को लापता हुए थे दोनों बच्चे

स्थानीय लोगों का कहना है कि दो जनवरी से अब तक कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन बच्चों का कोई पता नहीं चलना बेहद चिंता का विषय है। बच्चों के घर से चूड़ा लाने के लिए निकले थे और उसके बाद वापस नहीं लौटे। यह बात लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर रही है।

लोगों का कहना है कि जब तक बच्चों की सकुशल बरामदगी नहीं हो जाती, तब तक उनका आंदोलन और दबाव जारी रहेगा। धुर्वा क्षेत्र में फैला यह आक्रोश केवल बच्चों की गुमशुदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था पर उठते सवालों को भी दर्शाता है।

लोग चाहते हैं कि इस मामले का जल्द से जल्द खुलासा हो और दोषियों को कड़ी सजा मिले। फिलहाल पूरा इलाका बच्चों की सुरक्षित वापसी की दुआ कर रहा है और हर गुजरते दिन के साथ उम्मीद और बेचैनी दोनों बढ़ती जा रही हैं।
अंश-अंशिका बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक कैलाश यादव पीआर बांड पर रिहा

धुर्वा से लापता बच्चों अंश और अंशिका की बरामदगी को लेकर चल रहे आंदोलन से जुड़े अंश-अंशिका बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक कैलाश यादव को पुलिस ने पीआर बांड पर छोड़ दिया। पुलिस ने उन्हें सुबह करीब 11 बजे हिरासत में लिया था।

इसके बाद पूछताछ की गई और शाम करीब छह बजे पीआर बांड पर रिहा कर दिया गया। कैलाश यादव की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही आंदोलन से जुड़े लोगों में नाराजगी देखी गई, हालांकि रिहाई के बाद स्थिति सामान्य बनी रही।


पुलिस हर संभव प्रयास कर रही है। जल्द ही इस मामले का खुलासा होगा। कई टीम अलग अलग दिशा में काम कर रही है।
-

राकेश रंजन, एसएसपी रांची
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4610K

Credits

administrator

Credits
460242

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com