बीकॉम छात्रा ने नहर में लगाई छलांग। फाइल फोटो
संवाद सूत्र, नरवाना। बडनपुर गांव के पास नहर में शनिवार को एक युवती का शव मिला था। इस मामले में पुलिस को उसका बैग और मोबाइल बरामद हुआ है। युवती की पहचान कालता गांव निवासी 22 वर्षीय सलोनी उर्फ शालू के रूप में हुई है।
वह कुरुक्षेत्र में बीकाम की मार्कशीट लेने गई थी, जिसमें वह फेल हो गई थी। इस कारण उसने नहर में कूदकर आत्महत्या कर ली। यह सब उसने अपनी बहन दीक्षा के नाम सुसाइड नोट में लिखा था।
सलोनी की मां सुदेश ने बताया कि आठ जनवरी को सलोनी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में बीकाम की मार्कशीट लेने गई थी। वह कुरुक्षेत्र के गांव भैंसी माजरा में अपनी बुआ के घर गई थी। वहां से 10 जनवरी को अपने घर के लिए पिंडारसी रेलवे स्टेशन से सुबह 10:10 बजे ट्रेन में बैठी।
इसके बाद 11:34 बजे उसने बहन दीक्षा से फोन पर बात की। दीक्षा ने दोबारा फोन करने का प्रयास किया, लेकिन घंटी जाने के बाद फोन नहीं उठाया। बार-बार फोन करने के बाद जब फोन नहीं उठाया तो परिवार परेशान हो गया। उन्होंने बरसोला रेलवे स्टेशन पर पता किया तो कोई जानकारी नहीं मिली।
इसके बाद जीआरपी जींद में पता किया तो वहां उसकी लोकेशन चमेला कालोनी की मिली। जब वह नरवाना आ रहे थे तो बडनपुर नहर में शव मिलने का पता लगा। सलोनी की मां ने बताया कि उसकी बेटी बहुत ही सभ्य व शिक्षित थी।
उनको पूरा यकीन है कि उसकी बेटी का अपहरण किया है और उसकी हत्या की गई है। इसकी उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
सीआइए ने नहर पुल के पास ढूंढा मोबाइल फोन व बैग
सलोनी के स्वजन ने डीएसपी कमलदीप राणा से मोबाइल फोन व बैग ढूंढकर लाने की बात कही थी। डीएसपी ने सीआइए इंचार्ज सुखदेव को इसका जिम्मा सौंपा। सदर थाना पुलिस रेलवे स्टेशन पर स्वजन को साथ लेकर चली गई। पुलिस अमला जांच करता रहा।
सीआइए इंचार्ज सुखदेव सिंह ने चमेला कालोनी के पास रेलवे लाइन के सहारे-सहारे मोबाइल फोन व बैग ढूंढना शुरू कर दिया। वे सलोनी के फोन को ढूंढते-ढूंढते रेलवे लाइन नहर पुल के पास पहुंच गए। जहां उन्हें मोबाइल व बैग मिल गया। सीआइए इंचार्ज ने मोबाइल खोलकर देखा तो सुबह 11:16 बजे सुसाइड नोट डालने के बारे में पता लगा।
ये सब लिखा सुसाइड नोट में
डियर दीक्षा, मैं जानती हूं, जब तक यह नोट तुझे मिलेगा, मैं नहीं रहूंगी। पर कुछ ऐसा है जो मैं बताना चाहती हूं। मैं जानती हूं, मैंने बहुत दुख दिया है सबको, पर ट्रस्ट में मैंने ऐसा कभी नहीं चाहा। मम्मी-पापा सबकी बहुत बड़ी गुनहगार हूं। मैं बहुत बुरी बेटी हूं। एक बुरी बहन हूं। मुझे नहीं पता मैं कैंसे बताऊं क्या बोलूं। बस मुझे आखिरी बार माफ कर देना।
इसके बाद मैं कभी कोई दुख नहीं दूंगी। मैं फैल हो गई हूं ग्रेजुएशन में। मैं यह दुख सहन नहीं कर सकती। ऐसा नहीं है कि मैंने कोशिश नहीं कि बताने की, पर कभी बोल नहीं पाई। मैं यूनिवर्सिटी कंपलीट होते ही मरना चाहती थी, पर नहीं कर पाई।
तुम सबके साथ थोड़ा ओर जीना चाहती थी। इसलिए जब हुआ मैंने यह सच नहीं बताया, पर मैं अब और झूठ नहीं बोल सकती। मुझे माफ कर देना। मैं सबको बहुत प्यार करती हूं, यह सच है। मैं इतनी अच्छी फैमिली डिजर्व नहीं करती, मेरा मर जाना ही बेहतर है।
मेरा आप सबके साथ सफर यहीं तक था। मैं दुआ करूंगी आप सब खुश रहो। तुम दुनिया की सबसे अच्छी सिस्टर हो और हमेशा रहोगी, तुम सबका ख्याल रखना। मेरी वजह से कोई दुखी ना हो। मैं जानती हूं, यह जिम्मेदारी बहुत बड़ी है, तुझे अकेले पूरी फैमिली संभालनी है। पर मुझे यकीन है, मेरी बहन सब संभाल लेगी।
इसीलिए तेरे भरोसे सब छोड़ जा रही हूं। मम्मी-पापा को कहना, वो दोनों दुनिया के अच्छे पेरेंट्स हैं और मददगार हैं, पर मैं और धोखे में नहीं रख सकती सबको। मैं फैल हो गई, इसकी सजा सिर्फ मुझे मिलनी चाहिए। मेरे बैग में और गूगल-पे में पैसे रखे हैं, मम्मी को दे देना और मेरे अकाउंट में जो पैसे हैं, वह पापा को गूगल-पे कर देना।
मैं जानती हूं मुझे कोई माफ नहीं करेगा, पर कोशिश करना माफ करने की और मैं सबसे प्यार करती हूं। भरोसा तुझ पर है, इसीलिए तुझे बता रही हूं। तू मेरी सबसे बड़ी ताकत है, इसीलिए जी ली मैं। मैं सब कुछ हार गई। मैं बहुत बड़ी लूजर हूं, आइ एम, सारी। |