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बेतला में ‘टाइगर जिंदा है’: रांची के सैलानियों के सामने अचानक आ गया बाघ, वीडियो देख वन विभाग भी हैरान

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बेतला नेशनल पार्क में पर्यटकों ने देखा बाघ।



जागरण संवाददाता, लातेहार : पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के अंतर्गत स्थित ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण बेतला नेशनल पार्क से एक बार फिर रोमांचक और उत्साहवर्धक खबर सामने आई है।

सोमवार की सुबह लातेहार टूरिज्म के टूर पैकेज के तहत बेतला भ्रमण पर आए पर्यटकों ने जंगल सफारी के दौरान बाघ देखे जाने का दावा किया है।

खास बात यह रही कि पर्यटकों ने इस दुर्लभ दृश्य का वीडियो भी अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया, जो फिलहाल क्षेत्र में चर्चा और कौतूहल का विषय बना हुआ है।

यह घटना न केवल पर्यटकों के लिए जीवनभर की याद बन गई, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और पर्यटन की संभावनाओं को लेकर नई उम्मीदें भी जगी हैं।

लंबे समय से बाघों की वापसी को लेकर प्रतीक्षारत पलामू टाइगर रिजर्व के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।  
सुबह की सफारी में दिखा जंगल का राजा

पर्यटकों के अनुसार सोमवार की तड़के वे बेतला नेशनल पार्क के निर्धारित सफारी रूट पर भ्रमण के लिए निकले थे। मौसम सुहावना था और जंगल में सुबह की हल्की धूप फैल रही थी।

इसी दौरान पार्क के एक घने वन क्षेत्र में झाड़ियों के बीच उन्हें एक बाघ धूप सेंकते हुए दिखाई दिया। अचानक सामने आए इस दृश्य ने कुछ पलों के लिए सभी को स्तब्ध कर दिया। सफारी वाहन में सवार बच्चे, महिलाएं और पुरुष रोमांच और आश्चर्य से भर उठे।

हालांकि, शुरुआती क्षणों में हल्की घबराहट जरूर महसूस हुई, लेकिन वन विभाग द्वारा पहले से दी गई सुरक्षा संबंधी हिदायतों के कारण सभी ने संयम और शांति बनाए रखी। इसके बाद पर्यटकों ने मोबाइल कैमरों से इस दुर्लभ पल को रिकॉर्ड करना शुरू किया।

  
रांची से आए पर्यटकों ने साझा किया अनुभव

रांची (इरबा) से आए पर्यटकों ने साझा किया अनुभव बाघ देखे जाने का दावा करने वाले पर्यटकों में रांची के इरबा क्षेत्र से आए मेहताब अहमद, जैनब फलक, फहद हुसैन, अलीना फातिमा, कहकसा और अर्श अहमद शामिल हैं।

पर्यटकों ने बताया कि बाघ पूरी तरह शांत अवस्था में था और कुछ देर तक झाड़ियों के पास ही मौजूद रहा। इसके बाद वह धीरे-धीरे जंगल की गहराई में ओझल हो गया।

पर्यटकों का कहना है कि उन्होंने देश के अन्य टाइगर रिजर्व जैसे रणथंभौर, बांधवगढ़ और कान्हा का भी भ्रमण किया है, लेकिन बेतला के खुले और प्राकृतिक जंगल में इस तरह बाघ को देखना उनके लिए एक विशेष और अविस्मरणीय अनुभव रहा। कई पर्यटकों ने इसे अपने जीवन की सबसे यादगार यात्रा बताया।
वन विभाग अलर्ट, जांच प्रक्रिया शुरू

बाघ देखे जाने की सूचना मिलते ही वन विभाग हरकत में आ गया। पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जैना, बेतला वन क्षेत्र पदाधिकारी उमेश दुबे तथा महिला टूरिस्ट गाइड सोनम कुमारी द्वारा इस घटना की पुष्टि किए जाने की बात सामने आई है।

हालांकि, वन विभाग ने यह स्पष्ट किया है। बेतला के रेंजर उमेश दुबे ने बताया कि पर्यटकों और टूरिस्ट गाइड को पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

साथ ही बाघ और पर्यटकों दोनों की सुरक्षा को लेकर विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
गश्त बढ़ी, तकनीकी साक्ष्यों की जांच

वन विभाग के अनुसार, बाघ देखे जाने की सूचना मिलते ही पार्क क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है। संवेदनशील और संभावित इलाकों में अतिरिक्त वनकर्मियों की तैनाती की गई है।

जंगल के भीतर हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि वीडियो फुटेज, पगमार्क (पदचिह्न), कैमरा ट्रैप, स्कैट एनालिसिस (मल परीक्षण) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बाघ की मौजूदगी की तथ्यात्मक पुष्टि की गई और साक्ष्य स्पष्ट वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित होते हैं, तो इसे आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
पहले भी सामने आ चुके हैं बाघ के दावे

बेतला नेशनल पार्क और पूरे पीटीआर क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी को लेकर पहले भी कई बार दावे सामने आते रहे हैं। पिछले वर्ष जनवरी महीने में कोलकाता से आए पर्यटकों ने भी बाघ देखने का दावा किया था, जिसका वीडियो इंटरनेट मीडिया पर काफी वायरल हुआ था।

इसके अलावा, पिछले दो-तीन वर्षों में पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में कम से कम तीन से चार बाघों की मौजूदगी के दावे समय-समय पर सामने आते रहे हैं। हालांकि, वन विभाग का हमेशा यही रुख रहा है कि ठोस और वैज्ञानिक साक्ष्यों के बिना आधिकारिक घोषणा नहीं की जा सकती।
संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बार बाघ की मौजूदगी आधिकारिक रूप से पुष्ट होती है, तो यह झारखंड में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि होगी। इससे यह संकेत मिलेगा कि पलामू टाइगर रिजर्व और बेतला नेशनल पार्क में किए जा रहे संरक्षण प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

बाघ जैसे शीर्ष शिकारी (एपेक्स प्रीडेटर) की मौजूदगी से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन मजबूत होता है। इससे शाकाहारी जीवों की संख्या नियंत्रित रहती है और जंगल का प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा पर्यटन की दृष्टि से भी यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बेतला नेशनल पार्क पहले से ही अपने ऐतिहासिक किले, शांत झील, जंगल सफारी और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। यदि यहां बाघ की नियमित मौजूदगी की पुष्टि होती है, तो यह पार्क देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक बड़े आकर्षण का केंद्र बन सकता है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे जैसे टूर गाइड, होटल, होमस्टे, वाहन सेवा और हस्तशिल्प से जुड़े व्यवसाय। साथ ही क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
विशेष निगरानी टीम का गठन

बाघ की सुरक्षा और निगरानी को लेकर वन विभाग ने एक विशेष टीम का गठन किया है। इस टीम में देवपाल भगत, गुलसुन सुरीन, देवेंद्र कुमार देव, पर्यटन अधिकारी विवेक तिवारी, समीर तिग्गा, फील्ड बायोलॉजिस्ट तापस कर्मकार, कैमरामैन संजीव कुमार, राहुल कुमार, संतोष कुमार, निरंजन कुमार, सुकेसी बडिंग, बलदेव, हफिज सहित अन्य वनकर्मी शामिल हैं।

यह टीम जंगल के भीतर लगातार निगरानी कर रही है और किसी भी संभावित खतरे जैसे अवैध शिकार, मानवीय हस्तक्षेप या वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

पर्यटकों से अपील वन विभाग ने पर्यटकों से अपील की है कि वे पार्क भ्रमण के दौरान नियमों का सख्ती से पालन करें, जंगली जानवरों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वन्यजीवों को परेशान करना या उनके प्राकृतिक व्यवहार में हस्तक्षेप करना दंडनीय अपराध है।
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