15 साल बाद भी अधूरा जीटी रोड सिक्सलेन
संवाद सहयोगी, मोहनियां(कैमूर)। देश की प्रमुख सड़कों में शामिल कोलकाता–दिल्ली को जोड़ने वाला जीटी रोड (राष्ट्रीय राजमार्ग-19) 15 वर्षों बाद भी सिक्सलेन नहीं बन सका है। वर्ष 2011 में वाराणसी से औरंगाबाद तक 192 किलोमीटर लंबे इस राष्ट्रीय राजमार्ग को सिक्सलेन बनाने की शुरुआत हुई थी। उस समय यात्रियों को बेहतर और सुगम सफर की उम्मीद जगी थी, लेकिन आज भी यह सपना अधूरा ही है।
मोहनियां नगर क्षेत्र में जीटी रोड के दोनों ओर एक-एक सर्विस लेन का निर्माण होना है। दक्षिणी सर्विस लेन पर चार वर्ष पूर्व पीसीसी ढलाई का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि उत्तरी सर्विस लेन पर पिछले एक माह से काम शुरू हुआ है।
निर्माण की रफ्तार बेहद धीमी होने के कारण आवागमन बाधित हो रहा है और नगर में जाम की समस्या गंभीर बनी हुई है। कर्मनाशा से सासाराम तक कई स्थानों पर फ्लाईओवर और सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है, जिससे आए दिन जाम और दुर्घटनाएं हो रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सिक्सलेन का निर्माण अधूरा रहने के बावजूद पिछले 15 वर्षों से यात्रियों से सिक्सलेन का टोल वसूला जा रहा है।
निर्माण कंपनियां लगातार टोल से कमाई कर रही हैं, जबकि यात्रियों को बदहाल सड़क, डायवर्सन और धूल-गर्द से जूझना पड़ रहा है।
डायवर्सन पथों की हालत खराब है और पानी का छिड़काव न होने से उड़ने वाली धूल से आसपास के गांवों के लोग भी परेशान हैं। इस ओर न तो निर्माण कंपनी का ध्यान है और न ही एनएचएआइ के अधिकारियों का।
परियोजना की कुल लागत 2848 करोड़ रुपये आंकी गई थी और इसे वर्ष 2014 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। बाद में कार्य अवधि 2017 तक बढ़ाई गई।
जमीन अधिग्रहण और निर्माण कंपनियों के बदलने के कारण लागत और समय दोनों में बढ़ोतरी हुई, लेकिन इसके बावजूद काम अब तक पूरा नहीं हो सका।
इस दौरान टोल टैक्स की दरें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। वर्ष 2011-12 में जहां कार-जीप से 35 रुपये टोल लिया जाता था, वहीं अब अलग-अलग टोल प्लाजा पर यह 60 से 170 रुपये तक पहुंच चुका है।
टोल दरें हर साल बढ़ रही हैं, लेकिन यात्री सुविधाओं में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा। बिना सिक्सलेन पूरा किए टोल वसूली यात्रियों के साथ अन्याय है और यह सरकारी व्यवस्था व संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। |