जागरण संवाददाता, प्रयागराज। गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती की मिलन स्थली संगम की रेती में अध्यात्म की अलख जग रही है। तंबुओं की नगरी में संत और श्रद्धालु साधना में लीन हैं। भजन-कीर्तन की कर्णप्रिय गूंज, गंगा मइया के जयकारे बांध के नीचे गूंज रहे हैं। माघ मेला के दूसरे स्नान पर्व मकर संक्रांति की पुण्य बेला में डुबकी लगाने को बच्चे, युवा व बुजुर्ग मेला क्षेत्र पहुंचने लगे हैं। मकर संक्रांति स्नान पर्व दो दिन होगा।
सरकारी कैलेंडर के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति है, लेकिन उसका पुण्यकाल 15 जनवरी को है। ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार 14 जनवरी की रात 9.39 बजे धनु राशि से सूर्य मकर में आकर दक्षिणायण से उत्तरायण होंगे। यहीं से संक्रांति लगेगी।
इसके साथ देवताओं का दिन और दैत्यों की रात्रि आरंभ होगी। मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को रहेगा। मकर राशि में सूर्य और शुक्र का संचरण होगा। ज्येष्ठा नक्षत्र, वृद्धि योग रहेगा।
मकर संक्रांति पर क्या करें
पाराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार मकर संक्रांति पर कंबल, खिचड़ी, तांबा, स्वर्ण का दान करना चाहिए। इसमें लोहा और उड़द का दान नहीं करना चाहिए। इसका दान करने से जीवन में विपरीत प्रभाव पड़ता है। |