सांकेतिक तस्वीर।
राज्य ब्यूरो, जागरण देहरादून। केदारनाथ पैदल मार्ग पर संचालित घोड़े-खच्चरों की जगह-जगह बिखरी रहने वाली लीद (मल) अब यात्रियों के लिए परेशानी का सबब नहीं बनेगी, बल्कि इसे संसाधन के रूप में लिया जा रहा है।
कैबिनेट ने घोड़े-खच्चरों की लीद से पर्यावरण अनुकूल बायोमास पैलेट के उत्पादन के दृष्टिगत पायलट प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी है। पैलेट बनाने में चीड़ की पत्तियों यानी पिरुल का भी उपयोग किया जाएगा। साथ ही तरल पदार्थ से फर्टिलाइजर्स भी बनेगा।
यात्राकाल में 16 किलोमीटर लंबे केदारनाथ पैदल मार्ग पर 6000 घोड़े-खच्चरों का का संचालन श्रद्धालुओं की सुविधा और माल ढुलाई के लिए किया जाता है।
घोड़े-खच्चरों के लिए अलग मार्ग न होने के कारण मुख्य पैदल मार्ग पर इनकी लीद के निस्तारण की व्यवस्था न होने के कारण इससे उठने वाली दुर्गंध पैदल यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बनती है।
इस समस्या को देखते हुए पर्यटन विभाग ने घोड़े-खच्चरों की लीद को संसाधन के रूप में उपयोग करने की ठानी। कैबिनेट की बैठक में इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट का प्रस्ताव रखा गया, जिसे चर्चा के बाद मंजूरी दे दी गई।
यह है योजना
केदारनाथ पैदल मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर घोड़े-खच्चरों की लीद एकत्र करने के लिए सेंटर बनाए जाएंगे। फिर इस लीद व चीड़ की पत्तियों को 50:50 अनुपात में मिलाकर पैलेट तैयार किए जाएंगे।
साथ ही जो तरल पदार्थ निकलेगा, उससे फर्टिलाइजर के रूप में उपयोग में लाया जाएगा। पैदल मार्ग पर बायलर भी लगेंगे, जिससे घोड़े-खच्चरों को गर्म पानी उपलब्ध हो सकेगा।
इसके लिए पैलेट का ही उपयेाग किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट एक वर्ष तक चलेगा। इस कार्य के लिए गैर सरकारी संस्था का चयन किया जाएगा। इस प्रयोग के सफल रहने इसे अन्य यात्रा मार्गों पर भी लागू किया जाएगा।
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