ब्रिक्स नौ सेना अभ्यास में शामिल नहीं होने पर विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण (फाइल फोटो)
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत सरकार ने ब्रिक्स के तहत हो रहे नौ सेना अभ्यास में हिस्सा नहीं लिये जाने पर स्पष्टीकरण दिया है कि यह कोई नियमित ब्रिक्स गतिविधि नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता श्री रंधीर जायसवाल ने कहा है कि यह पूरी तरह से दक्षिण अफ्रीका की पहल है।
जायसवाल ने कहा, “हम स्पष्ट करते हैं कि उक्त अभ्यास पूरी तरह से दक्षिण अफ्रीका की पहल थी जिसमें कुछ ब्रिक्स सदस्यों ने हिस्सा लिया। यह कोई नियमित या संस्थागत ब्रिक्स गतिविधि नहीं थी, न ही सभी ब्रिक्स सदस्यों ने इसमें हिस्सा लिया। भारत ने पहले की ऐसी गतिविधियों में हिस्सा नहीं लिया है।“
ब्रिक्स देशों ने नवल अभ्यास किया शुरू
उन्होंने कहा, “इस संदर्भ में भारत जिस नियमित अभ्यास का हिस्सा है वह आइबीएसएएमएआर समुद्री अभ्यास है जो भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाओं को एक साथ लाता है। इसका अंतिम संस्करण अक्टूबर 2024 में आयोजित हुआ था।\“\“
एक दिन पहले, 16 जनवरी 2026 को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिग में जायसवाल ने इस अभ्यास का जिक्र करते हुए कहा था कि दक्षिण अफ्रीका के निमंत्रण पर कुछ ब्रिक्स सदस्यों ने नवल अभ्यास शुरू किया है, लेकिन उन्होंने भारत की भागीदारी पर कोई टिप्पणी नहीं की थी।
ब्रिक्स प्लस के तहत हो रहा \“विल फॉर पीस 2026\“ नाम का सैन्य अभ्यास 9 जनवरी से 16 जनवरी 2026 तक दक्षिण अफ्रीका के जलक्षेत्र में आयोजित हुआ। यह अभ्यास चीन के नेतृत्व में था और इसका उद्देश्य शि¨पग सुरक्षा और समुद्री आर्थिक गतिविधियों को सुनिश्चित करना था। इसमें मुख्य रूप से भाग लेने वाले देश दक्षिण अफ्रीका, चीन, रूस और ईरान थे।
अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंध
पर्यवेक्षक के रूप में ब्राजील, मिस्त्र, इथियोपिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इंडोनेशिया शामिल हुए। भारत ने इसमें कोई भाग नहीं लिया, जैसा कि विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है। इस अभ्यास ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद भी पैदा हो गया है। प्रमुख तौर पर इसमें हिस्सा लेने वाले उक्त चारों देशों के साथ अमेरिका के अभी बहुत ही तनावपूर्ण संबंध हैं।
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