राहुल कुमार, साहिबाबाद। आने वाले दिनों में खोड़ा व मोदीनगर समेत छह और क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी पता चल सकेगा कि वह कितनी जहरीली हवा में रह रहे हैं। इन क्षेत्रों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने प्रदूषण मापक यंत्र लगाने शुरू कर दिए हैं। ये मार्च के पहले सप्ताह में शुरू हो जाएंगे। उम्मीद लगाई जा रही है कि मापक यंत्रों की संख्या बढ़ने पर जिले का औसत एक्यूआई में कमी आएगी।
जिले में वर्तमान में इंदिरापुरम, लोनी, वसुंधरा व संजय नगर में प्रदूषण मापक यंत्र लगे हैं। सीपीसीबी अब लोनी में दो और, मोदीनगर में एक, शहर में दो और एक खोड़ा में प्रदूषण मापक यंत्र लगा रहा है। इनमें से लोनी के सादुल्लाबाद में एक, मोदीनगर के एसआरएन कॉलेज में और खोड़ा में भी एक प्रदूषण मापक यंत्र इंस्टाल कर लिया गया है।
छह और प्रदूषण मापक यंत्र लगने से कुल 10 हो जाएंगे। इससे उन क्षेत्र के लोगों को भी प्रदूषण का कारण पता चल सकेगा। प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक अधिक प्रदूषण वाले इलाकों में मापक यंत्र लगे हैं।
जिन इलाकों में लगे हैं यहां औद्योगिक इकाइयां और जाम की सबसे बड़ी समस्या रहती है। इस कारण यहां का प्रदूषण बहुत अधिक रहता है। छह और स्थानों पर मापक यंत्र लगने से यहां के लोगों को भी एक्यूआइ का पता चल सकेगा।
18 करोड़ का बजट किया जा रहा खर्च
प्रत्येक प्रदूषण मापक यंत्र पर करीब तीन करोड़ का बजट खर्च किया जा रहा है। यानी कुल छह प्रदूषण मापक यंत्र लगाने पर 18 करोड़ खर्च किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि इन मापक यंत्रों को विदेश से मंगाए जाते हैं इसीलिए अधिक खर्चा आता है। इन्हें लगाने का कार्य सीपीसीबी कर रहा है।
संख्या बढ़ने पर घटेगा औसत एक्यूआई
एक अधिकारी ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि जिला देश में सबसे अधिक प्रदूषित इसीलिए रहता है क्योंकि यहां मापक यंत्र कम संख्या में हैं। दिल्ली में अधिक संख्या में मापक यंत्र लगे हैं। इसीलिए दिल्ली का औसत एक्यूआई ज्यादातर दिन कम ही आता है।
प्रदूषण मापक यंत्र लगाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। चार स्थानों पर मशीनें इंस्टाल कर दी गई हैं। फरवरी के अंत तक पूरी तर से कार्य पूरा कर मार्च से शुरू हो जाएंगे।
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-अंकित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, यूपीपीसीबी |
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