जागरण संवाददाता, रामपुर। नगर क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में आवारा कुत्तों और बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि रोजाना बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इनके हमलों का शिकार हो रहे हैं।
बावजूद इसके संबंधित विभागों के अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद भी न तो आवारा कुत्तों को पकड़ा जा रहा है और न ही बंदरों को पकड़ने की कोई प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।
कोतवाली क्षेत्र के गांव बिजड़ा में बंदरों का आतंक चरम पर है। ग्रामीणों के अनुसार रोजाना दो से तीन लोग बंदरों के हमले में घायल हो रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को हो रही है, जिनका छतों पर चढ़ना तक जानलेवा साबित हो रहा है।
बंदर न केवल हमला कर रहे हैं बल्कि घरों से सामान उठाकर ले जाना भी आम बात हो गई है। इस गांव में बंदरों के हमले से इदरीश अहमद, आहिल, सनम बी और आयान गंभीर रूप से जख्मी हो चुके हैं।
वहीं, कोतवाली परिसर में भी बंदरों का आतंक देखने को मिल रहा है, जिससे पुलिसकर्मी भी परेशान हैं। स्वार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महज दो दिनों के भीतर आवारा कुत्तों के काटने से घायल 32 बच्चे और बड़े इलाज के लिए पहुंचे।
लगातार हो रही घटनाओं से लोगों में भारी रोष है। ग्रामीणों और नगरवासियों का कहना है कि यदि जल्द ही आवारा कुत्तों और बंदरों को पकड़ने के लिए ठोस अभियान नहीं चलाया गया तो बड़ा हादसा भी हो सकता है।
लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की है, ताकि आमजन को इस भयावह स्थिति से राहत मिल सके। एसडीएम अमन देओल ने बताया कि विभागीय अधिकारियों को आदेशित कर कार्रवाई कराई जायेगी।
कुत्ते और बंदरों के काटने से यह लोग हुए घायल
शंकर लाल मुहल्ला स्वार खास, इकरा बी समोदिया, सोमपाल पुसे की मंडिया, प्रिंश धनौरी, हरिओम चाऊपुरा, चंद्रपाल करनपुर, ओमप्रकाश देवरिया, आदर्श समोदिया, अली अहमद भूकापुर, पूजा लाडपुर, मुस्कान मुहल्ला चक स्वार, युवराज गम्मनपुरा, रेहान हाशमीनगर, मुख्तियार अकराबाद, लईक अहमद मुहल्ला काशीपुर, बिलाल रतनपुरा, सिदरा बी बिजड़ा, तानिया किशनपुर, महक बी मिलकखानम, अरनव नरायणपुर, गौरव चाऊपुरा, मोहम्मद तौफिस मसवासी, ललित रहमतगंज, नाजिम मीरापुर, मोहम्मद परवेज मसवासी, शहान गनला गनेश, अक्षत सैनी सीतारामपुर, श्रीद्धा अलीनगर, मोहम्मद अर्श अजीमनगर, जुवैरिया गांगननगली, खालिदा अलीनगर और इदरीश धनुपुरा शामिल हैं।
लोगों से बातचीत
सुबह दुकान खोलने से पहले ही डर लगता है। आवारा कुत्ते झुंड में घूमते हैं। कई बार ग्राहकों पर भी भौंककर दौड़ पड़ते हैं। कई बार शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इदरीश अहमद
बंदर छतों पर चढ़कर कपड़े और खाने-पीने का सामान उठा ले जाते हैं। छोटे बच्चों को अकेले बाहर भेजने में डर लगता है। पहले ऐसी समस्या नहीं थी, लेकिन अब हालात बिगड़ते जा रहे हैं।
गुलफाम बादशाह
रात के समय सड़कों पर कुत्तों का झुंड पीछा करता है। कई बार गिरते-गिरते बचे हैं। अगर किसी को काट लें तो इलाज में भी काफी खर्च आता है। प्रशासन को तुरंत अभियान चलाना चाहिए।
जुनैल पाशा
बुजुर्गों के लिए सबसे ज्यादा खतरा है। सुबह टहलने निकलो तो बंदरों का सामना हो जाता है। आवारा कुत्ते के आये दिन हमला करते रहते हैं। जिससे काफी परेशान होती है।
आसिम अली |