राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विदेशी एजेंसियों द्वारा छात्रों और शिक्षकों के जरिये देश से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां हासिल करने की कोशिशों को लेकर सरकार सतर्क है।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस खतरे को गंभीर मानते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उत्तर प्रदेश सहित देशभर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को अलर्ट जारी किया है और छात्रों-शिक्षकों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही यह भी कहा गया है कि वे साइबर सुरक्षा, डिजिटल जागरूकता और राष्ट्रीय हित से जुड़े विषयों पर नियमित रूप से सेमिनार और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें, ताकि छात्र और शिक्षक किसी भी तरह की साजिश का शिकार न बनें।
यूजीसी ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को संबोधित पत्र में कहा है कि कुछ विदेशी एजेंसियां और हित समूह सुनियोजित तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे लिंक्डइन, नौकरी डाट काम जैसे जाब पोर्टल और अन्य आनलाइन प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।
खासतौर पर पत्रकारिता, रक्षा क्षेत्र और रणनीतिक विषयों से जुड़े अनुभवी लोगों की पहचान कर उनसे संपर्क साधा जा रहा है। इन लोगों से भारत की विदेश नीति, सैन्य तैनाती, हथियार प्रणालियों, रक्षा खरीद, सैन्य अभ्यास और सुरक्षा से जुड़े अन्य संवेदनशील विषयों पर लेख लिखवाने का दबाव बनाया जा रहा है।
इसके बदले उन्हें रकम देने का लालच दिया जाता है। भुगतान के लिए भारतीय बैंक खातों, विदेशी ट्रांसफर, छात्रों के खातों या साइबर फ्राड से जुड़े माध्यमों का सहारा लिया जा रहा है।
यूजीसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि कई मामलों में ये विदेशी एजेंसियां अपनी असली पहचान छिपाकर खुद को विदेशी कंसल्टिंग फर्म या रिसर्च संस्था का प्रतिनिधि बताती हैं।
कुछ घटनाओं में रक्षा पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड जैसी बेहद संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारियां भी हासिल की गई हैं, जो देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से कहा है कि इस चेतावनी का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए।
विश्वविद्यालयों और कालेजों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को जागरूक करें और समझाएं कि किसी भी संदिग्ध प्रस्ताव, ई-मेल, आनलाइन संदेश या अनजान संपर्क से सतर्क रहें।
बिना सत्यापन किसी भी विदेशी प्रस्ताव को स्वीकार न किया जाए और किसी भी स्थिति में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी या व्यक्तिगत संवेदनशील जानकारी साझा न की जाए। जरूरत पड़ने पर ऐसे मामलों की तुरंत सूचना संबंधित संस्थान प्रशासन और सक्षम सरकारी एजेंसियों को दी जाए। |