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ब‍िहार कृष‍ि व‍िश्‍वव‍िद्यालय के व‍िज्ञान‍ियों ने क‍िया कमाल, मखाना हार्वेस्टर मशीन से घंटों का काम मिनटों में हो जाएगा

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बि‍हार कृषि‍ व‍िश्‍वव‍िद्यालय के व‍िज्ञान‍ियों के साथ कुलपत‍ि  



जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर जिले के सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के विज्ञानियों ने एक ऐसी मखाना हार्वेस्टर मशीन विकसित की है जो कम समय और कम लागत में गुणवत्तापूर्ण मखाना बीज की हार्वेस्टिंग करने में सक्षम है। इसके प्रयोग से राज्य के करीब पांच लाख मखाना किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। अब इसके लिए मखाना किसानों और मजदूरों को तालाबों के कीचड़ में उतरकर दिन-दिन भर कड़ी मेहनत करने की मजबूरी से मुक्ति मिल जाएगी।

पूर्णिया में किया गया जीवंत प्रदर्शन


10 जनवरी को बीएयू सबौर के अधीन संचालित पूर्णिया स्थित भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में इस मशीन का तालाब में प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बिहार सरकार के कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल और बीएयू के कुलपति डा. डी.आर. सिंह की उपस्थिति रही। विज्ञानियों ने मशीन की कार्यक्षमता का जीवंत प्रदर्शन किया।

  

  • पारंपरिक बोझिल तरीकों व किसानों और मजदूरों को तालाब व कीचड़ में उतरने से मिलेगी मुक्ति
  • कम लागत व कम समय में करेगी हारवेस्टिंग, पांच लाख मखाना कृषकों को होगा लाभ
  • बिहार को मखाना उत्पादन क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होगी मशीन : विशेषज्ञ
  • 10 जनवरी को बीएयू सबौर के अधीन संचालित पूर्णिया स्थित भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय में इस मशीन का तालाब में किया गया प्रत्यक्ष प्रदर्शन

पारंपरिक पद्धति से राहत

अब तक मखाना की कटाई पारंपरिक विधि से की जाती रही है। उसमें मजदूरों को पानी और कीचड़ में उतरकर लंबे समय तक काम करना पड़ता था। इस प्रक्रिया में जहां मानवीय जोखिम, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और अधिक श्रम लगता था, वहीं लागत भी अधिक आती थी। विज्ञानियों के अनुसार, पारंपरिक विधि से एक एकड़ क्षेत्र से मखाना बीज निकालने में तीन चरणों में 18 से 20 दिन लगते थे। इसमें 20–21 मजदूरों की आवश्यकता होती थी और खर्च 28 से 30 हजार रुपये तक पहुंच जाता था, जबकि औसत उपज 6–7 क्विंटल ही मिलती थी।

मशीन से लागत व समय में भारी बचत


बीएयू द्वारा विकसित सबौर मखाना हार्वेस्टर मशीन से मात्र 1 से 5 दिनों में एक एकड़ क्षेत्र से 6–7 क्विंटल मखाना बीज निकाला जा सकता है। इसमें केवल 7 से 10 मजदूरों की जरूरत पड़ती है और कुल लागत घटकर 10 से 12 हजार रुपये रह जाते हैं। यही नहीं, यह मशीन 5–6 घंटे में ही 60 से 70 प्रतिशत तक मखाना बीज निकालने की क्षमता रखती है। इससे किसानों को तीव्र व सुरक्षित ढंग से कटाई का लाभ मिलता है।

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम


कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह मशीन मखाना उत्पादन में यांत्रिकीकरण को बढ़ावा देगी और उत्पादन लागत घटने से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने इसे बिहार की विशिष्ट फसल मखाना के लिए मील का पत्थर बताया।
बीएयू के कुलपति डा. डी.आर. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय मखाना जैसी विशिष्ट और पारंपरिक फसलों के वैज्ञानिक विकास, तकनीकी नवाचार और यंत्रीकरण के लिए लगातार काम कर रहा है। यह मशीन न केवल किसानों की मेहनत कम करेगी, बल्कि मखाना उत्पादन को भी नई गति देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बीएयू सबौर की यह पहल बिहार को मखाना उत्पादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होगी।
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