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संवाद सूत्र जागरण, रजपुरा। ब्लाक क्षेत्र में सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान आरोग्य मंदिर योजना जमीनी स्तर पर बदहाली का शिकार नजर आ रही है। कहीं केंद्रों पर दबंगों ने कब्जा कर पशुओं का तबेला बना रखा है तो कहीं स्वास्थ्य सेवाएं ताले में बंद पड़ी हैं। यह हालात ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं।
गुन्नौर तहसील क्षेत्र के रजपुरा ब्लाक में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल स्थिति में हैं। जिस कारण ग्रामीण क्षेत्र में स्थिति खराब है और लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भटकना पड़ता है। सबसे चौंकाने वाला मामला गांव सिंघोला दौलत सिंह का सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जन आरोग्य मंदिर पर गांव के ही कुछ दबंगों ने अवैध रूप से कब्जा कर केंद्र परिसर में पशुओं को बांध रखा गया है। जिससे वहां तबेले जैसा नजारा दिखाई देता है।
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स्थानीय लोगों के अनुसार लंबे समय से यह केंद्र स्वास्थ्य सेवाओं के बजाय दबंगों के कब्जे का अड्डा बना हुआ है। मौके पर कोई सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) तैनात नहीं मिला और केंद्र पूरी तरह निष्क्रिय नजर आया। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जिससे दबंगों के हौंसले और बुलंद हो गए हैं।
इसी क्रम में जागरण टीम ने गांव सिंघोली कल्लू में पड़ताल की गई, जहां स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर नजर आई। यहां आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर तैनात सीएचओ अजीम मौके पर मौजूद मिले और मरीजों का ब्लड प्रेशर जांच रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन करीब 20 से 30 लोग यहां दवा लेने आते हैंं और प्राथमिक उपचार से उन्हें काफी राहत भी मिलती है। ग्रामीणों ने भी कहा कि इस केंद्र से उन्हें बुखार, बीपी, शुगर जैसी सामान्य बीमारियों में समय पर इलाज मिल जाता है। जिससे उन्हें दूर के अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाना पड़ते।
किराए के भवन में चल रहा आरोग्य मंदिर
वही, गांव चमरपुरा में सीएचओ दानिश अली मौके पर मिले। यहां आयुष्मान आरोग्य मंदिर किराये के भवन में चल रहा है। जहां व्यवस्था सबसे बेहतर मिली। दानिश ने कहा कि यहां 15 से 25 मरीज प्रति दिन आते हैं। हालांकि रजपुरा ब्लाक की तस्वीर यहीं तक सीमित नहीं है। गांव सिंघोली पूर्वी में स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर भी ताला लटका मिला। केंद्र बंद होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार केंद्र खुलने का इंतजार किया गया। लेकिन कोई स्वास्थ्य कर्मी नहीं आया। मजबूरी में मरीजों को निजी अस्पतालों या दूर के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करना पड़ता है। जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के दावे तो किए जाते हैं।
मगर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। कहीं दबंगों का कब्जा है तो कहीं स्टाफ की अनुपस्थिति। कुछ जगह केंद्रों पर ताले लटके हैं। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो सरकार की आयुष्मान आरोग्य मंदिर योजना केवल कागजों तक ही सिमट कर रह जाएगी। |
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