भारतीय मीडिया फाउंडेशन के पदाधिकारियों और सैकड़ों लोगों ने यूजीसी एक्ट के विरोध में पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन नायब तहसीलदार वाजिद हुसैन को सौंपा।

मेहता पार्क पर एकत्रित हुए प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर पोस्टर थाम रखे थे। उन्होंने कानून को वापस लेने की मांग की। यह प्रदर्शन अनिल सोलंकी के नेतृत्व में किया गया, जिसमें बुद्धिजीवी और सवर्ण समाज के लोग शामिल थे।
अनिल सोलंकी ने बताया कि इस कानून में सुधार की आवश्यकता है, और यदि सुधार संभव नहीं है तो इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि इस कानून के तहत दलित समाज के बच्चों द्वारा सवर्ण समाज के लड़के-लड़कियों पर गलत आरोप लगाकर हरिजन एक्ट का दुरुपयोग किया जा सकता है, जिससे उनकी पढ़ाई और नौकरी प्रभावित होगी।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कानून में झूठी शिकायत करने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा में समानता पर जोर दिया। ज्ञापन के माध्यम से यह भी कहा गया कि यदि कोई सवर्ण या ओबीसी समाज का छात्र/छात्रा दलित बच्चे के साथ भेदभाव का दोषी पाया जाता है।
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