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MP में कोल्ड्रिफ कप सीरप मामले की जांच चार माह बाद भी अधूरी, मृत बच्चों के स्वजन ने दी आंदोलन की चेतावनी

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कोल्ड्रिफ कफ सीरप (प्रतीकात्मक चित्र)



डिजिटल डेस्क, जबलपुर। कोल्ड्रिफ कफ सीरप से मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिलों के 25 और बैतूल जिले के तीन बच्चों की मौत के मामले की जांच चार माह से चल रही है। इसमें देरी से मृत बच्चों के स्वजन में नाराजगी है।

उनका आरोप है कि कुछ प्रमुख आरोपितों को बचाने के लिए जानबूझकर जांच को लटकाया जा रहा है। वह अब आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। उन्होंने 17 फरवरी को परासिया थाने के सामने प्रदर्शन करने की छिंदवाड़ा प्रशासन से अनुमति मांगी है।
कार्रवाई में ढील से नाराजगी

मृतक बच्चों के स्वजन का आरोप है कि निजी क्लीनिक चलाने वाले डॉ. अमित ठाकुर और डॉ. अमन सिद्दीकी ने कई बच्चों को कोल्ड्रिफ कफ सीरप लिखी थी, लेकिन जांच अधिकारी ने उन्हें अब तक आरोपित नहीं बनाया है।

विसरा रिपोर्ट मिल चुकी है, जो जांच की दिशा में अहम कड़ी है, लेकिन बच्चों के स्वजन कार्रवाई में देरी से बेहद असंतुष्ट हैं। उनका कहना है कि जिस तरह से इन दोनों डॉक्टरों को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है, उससे जांच पर उनको विश्वास नहीं रह गया है।

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एसआईटी का यह तर्क

एसआईटी का नेतृत्व कर रहे परासिया के एसडीओपी जितेंद्र जाट का कहना है कि अभी तक उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच की गई है। दोनों आरोपित डाक्टरों को लेकर मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस पर लीपापोती का आरोप

बच्चों के स्वजन की पैरवी कर रहे अधिवक्ता संजय पटोरिया का आरोप है कि पूरे मामले में पुलिस ने लीपापोती की है। पुलिस ने प्रारंभिक चालान पेश कर दिया, लेकिन जिन लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनके नाम तक उल्लेखित नहीं किए। पर्याप्त सबूत होने के बावजूद कुछ आरोपितों को न तो गिरफ्तार किया गया और न ही उनके नाम कार्रवाई में शामिल किए गए।
ऐसे चली जांच की प्रक्रिया

  • कोल्ड्रिफ कफ सीरप के सेवन से सितंबर 2025 से किडनी फेल होने के कारण मौतें शुरू हो गई थी।
  • 04 अक्टूबर 2025 को ब्लाक मेडिकल आफिसर परासिया की शिकायत पर मामला दर्ज कर एसआइटी गठित की गई थी।
  • 08 अक्टूबर 2025 को पहली बार प्रकरण दर्ज किया गया था।
  • एसआइटी ने अब तक डा. प्रवीण सोनी, श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के मालिक जी रंगनाथन समेत 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
  • तीन महीने जांच के बाद एसआइटी ने जनवरी 2026 में परासिया के स्थानीय न्यायालय में 4 हजार 500 पेज की चार्जशीट पेश की थी।
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