द्वारका में सड़क हादसे का शिकार हुए साहिल धनेश्वरा की मां इन्ना माकन। फोटो- जागरण ग्राफिक्स
जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। एक मां के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि उसे अपने ही बच्चे की शांति सभा में शामिल होना पड़े। नियम तो यह कहता है कि बच्चों को मां-बाप की प्रार्थना सभा में होना चाहिए, पर बदकिस्मती का आलम देखिए कि मैं अपने इकलौते सहारे के बिना यहां बैठी हूं।
ये शब्द द्वारका साउथ इलाके में सड़क हादसे का शिकार हुए 23 वर्षीय साहिल धनेश्वरा की मां, इन्ना माकन के हैं। द्वारका में 3 फरवरी को हुए उस भयावह हादसे ने न केवल एक नौजवान की जान ली, बल्कि एक सिंगल मदर के बुढ़ापे की लाठी और उनके जीवन के एकमात्र आधार को भी सदा के लिए छीन लिया।
साहिल के गर्म कपड़ों को अपने सीने से लगाकर बिलख रही मां के पास अब जीने का सिर्फ एक ही मकसद बचा है अपने बेटे को न्याय दिलाना। इन्ना माकन यह कहकर फूट-फूटकर रोने लगती हैं कि सड़क पर तड़पता रहा मेरा लाल पर किसी ने से मदद नहीं की। हादसे के बाद लोगों की भीड़ तो जुटी, लेकिन किसी का हाथ मदद के लिए आगे नहीं बढ़ा।
खड़ी थी एंबुलेंस, पर नहीं ले जाया गया था अस्पताल
साहित की मां कहती हैं जब मैं दुर्घटनास्थल पर पहुंची, वहां एम्बुलेंस खड़ी थी, पुलिस थी, लेकिन मेरे बेटे को तुरंत अस्पताल ले जाने की तत्परता किसी ने नहीं दिखाई। मेरा बच्चा 10 मिनट तक सड़क पर तड़पता रहा, दर्द से कराहता रहा, लेकिन सब तमाशबीन बने रहे। अगर उसे उन कीमती मिनटों में डॉक्टरी सहायता मिल जाती, तो शायद वह आज मेरे पास होता।
अब सिस्टम को इस घटना के बाद ऐसे लोगों को संदेश देना होगा जो सड़कों पर नियमों की धज्जी उड़ाते हैं, ताकि मेरी तरह कोई और मां इस तरह अपने लाल को न खोए।क्योंकि यह हादसा नहीं हत्या है और इसके लिए कार चलाने वाले से लेकर अपने नाबालिग बेटे को कार देने वाला पिता भी उतना ही जिम्मेदार है।
रील बनाने के शौक ने छीन लिया एक मां का इकलौता सहारा
इस पूरे मामले में रील कल्चर का एक काला और खौफनाक पक्ष सामने आया है। मां का गंभीर आरोप है कि यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई लापरवाही है। बताया जा रहा है कि आरोपित नाबालिग अपनी बहन के साथ स्कॉर्पियो कार में स्पीड फन रील बना रहा था।
सोशल मीडिया पर इस हादसे का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें काले रंग की स्कॉर्पियो तेज रफ्तार में जा रही थी, तभी एक स्कूल बस के पीछे से साहिल अपनी यामाहा आर 15 बाइक से आता दिख रहा है और इसके पहले कि वह कुछ समझपाता उसकी बाइक तेज रफ्तार में आ रही स्कॉर्पियों से टकरा गई।
स्कॉर्पियों की रफ्तार इतनी तेज थी कि चला रहा नबालिग बाइक में टक्कर मारने के बाद भी वह नहीं रुक और जाकर सड़क किनारे खड़ी कैब से जा टकराई जिससे कैब बुरी तरह से क्षितग्रस्त हो गई, जिसमें उस कार का चालक भी गंभीर रुप से घायल हो गया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बयां करती है हादसे की भयावहता
साहिल की पोस्टमॉर्टम (आटोप्सी) रिपोर्ट इस हादसे की भयावहता को बयां कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक टक्कर और उसके बाद सड़क पर गिरने से साहिल के सिर के बाएं हिस्से में गंभीर फ्रैक्चर हुआ था। टक्कर के प्रभाव से दिमाग के भीतर भारी खून का थक्का जम गया था, जिससे दिमाग में घातक सूजन आ गई थी।
साहिल की बाईं ओर की तीन पसलियां (चौथी, पांचवीं और छठी) पूरी तरह चकनाचूर हो गई थीं। टूटी हुई पसलियों और टक्कर के दबाव के कारण फेफड़ों में गहरा जख्म हुआ, जिससे शरीर के भीतर भारी रक्तस्राव होने लगा। रिपोर्ट के अनुसार अत्यधिक खून बहने और सिर की गंभीर चोटों के कारण साहिल की हादसे को कुछ ही समय बाद मौत हो गई।
जिस स्कॉर्पियो से हुआ हादसा, ओवरस्पीडिंग के है 13 लंबित चालान
जांच में सामने आया है कि यूपी नंबर की जिस स्कॉर्पियो को नाबालिग चला रहा था उप पर पहले से 13 चालान लंबित है। वह सभी चालान यूपी और दिल्ली के विभिन्न इलाकों के ओवरस्पीडिंग के चालान हैं, जिसे ट्रैफिक पुलिस के कैमरे ने कैद किया था और आनलाइन चालान जारी किया गया था। पर किसी भी चालान को भरा नहीं गया है।
साहिल की मां का आरोप है कि यह चालान निगरानी रखने वाली ट्रैफिक सिस्टम की विफलता को उजागर करता है। उनका कहना है कि यह सवाल यह उठता है कि जिस गाड़ी पर बार-बार नियमों को तोड़ने के आरोप थे, उसे सड़कों पर बेखौफ घूमने की अनुमति कैसे मिली। अगर पुलिस ने इस वाहन पर कार्रवाई की होती तो यह हादसा न होता।
\“बेटे के अंतिम संस्कार के रस्मों में व्यस्त थी और उसके हत्यारे को छोड़ दिया\“
साहिल की मां कहती हैं जिस वक्त एक मां अपने इकलौते बेटे के अंतिम संस्कार और शांति पाठ की रस्मों में व्यस्त थी, उसी दौरान 17 वर्षीय आरोपित नाबालिग को 10वीं की बोर्ड परीक्षा का हवाला देकर अंतरिम जमानत दे दी गई। उएक मां का सवाल है, क्या कानून की नजर में किसी की जान की कीमत महज एक स्कूल परीक्षा से कम है।
जस्टिस फॉर साहिल सोशल मीडिया पर बना जन-आंदोलन
साहिल की मौत के बाद न्याय की मांग अब केवल उसके परिवार तक सीमित नहीं रही है। सोशल मीडिया पर जस्टिस फोर साहिल अभियान तेज हो गया है। एक ऑनलाइन याचिका पर अब तक 4 हजार से अधिक लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं, जो आरोपित और उसके पिता जो वाहन मालिक हैं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
द्वारका साउथ पुलिस ने बीएनएस की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। डीसीपी द्वारका ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर आश्वासन दिया है कि सीसीटीवी फुटेज, आटोप्सी रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।
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