प्रतीकात्मक चित्र
संवाद सहयोगी, चंदौसी। न्यायालय ने दहेज के लिए पत्नी की हत्या करने वाले दोषी पति को 13 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार का जुर्माना भी लगा है। दहेज हत्या की यह घटना संभल कोतवाली क्षेत्र में साल 2020 में हुई थी। 12 फरवरी को न्यायालय ने उक्त मामले में मृतका की चाची और पति को दोष सिद्ध कर फैसला सुरक्षित रखा था। 13 फरवरी को इस मुकदमे में चाची फिरदौस को सजा हुई थी, जबकि पति फरमान के न्यायालय में अनुपस्थित होने की वजह से गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया गया था।
मंगलवार को पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया। यहां उसे 13 वर्ष की जेल हुई है। संभल के देहली दरवाजा निवासी महरूल ने देवरानी फिरदौस और उसके हसनपुर निवासी भतीजे फरमान पर दहेज के लिए उसकी बेटी महक की हत्या करने का आरोप लगाया था। उसने बताया कि महक ने फरमान से प्रेम विवाह किया था।
तीन महीने बाद ही फरमान ने दहेज में दो लाख रुपये न लाने पर उसे घर से निकाल दिया था। इसके बाद से महक देहली दरवाजा में अपनी चाची फिरदौस के यहां रहने लगी थी। साल 2020 में 13 /14 जून की रात फिरदौस और फरमान ने दुपट्टे से कला दबाकर महक की हत्या कर दी। इसके बाद फिरदौस ने गुमराह करने के लिए पुलिस को एक प्रार्थना पत्र दिया।
इसमें महक की हत्या का आरोप उसके मायके वालों पर लगा दिया। कहा था कि मायके वाले महक के प्रेम विवाह से खुश नहीं थे। जिस पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। बाद में एक प्रार्थना पत्र महक की मां महरूल की तरफ से दिया गया। जिसमें कहा कि फिरदौस उसकी देवरानी है। वह मकान के बंटवारे को लेकर रंजिश रखती है। उसने बेटी महक का अपने भतीजे फरमान से प्रेम विवाह करा था।
इसके बाद दहेज के लिए हत्या कर दी। पुलिस ने पूरे प्रकरण की जांच की तब पूरा राज खुल गया। यहां फरमान ने घटना वाले दिन खुद को हसनपुर में होने के बारे में बताया था, जबकि उसकी काल डिटेल और लोकेशन से उसके संभल और फिरदौस के घर में होने के साक्ष्य मिले थे। इसके बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो सारा राज खुल गया।
दोनों ने गला दबाकर महक की हत्या करने की बात कबूली। इसके बाद पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया। साथ ही दोनों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने बताया कि इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अवधेश कुमार के न्यायालय में चल रही थी।
गुरुवार को न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फरमान और फिरदौस को दोष सिद्ध किया था। शुक्रवार को इस प्रकरण में न्यायालय ने फिरदौस को दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। जबकि फरमान के खिलाफ वारंट जारी किए थे। मंगलवार को पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया।
यहां न्यायालय ने उसे पत्नी की हत्या के जुर्म में तेरह साल के कारावास की सजा सुनाई। दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। मानिटरिंग सेल के प्रभारी राजाराम सागर ने बताया की इस मुकदमे में कोर्ट पैरोकार कांस्टेबल सुमित सैनी और कोर्ट मोहर्रिर हेड कांस्टेबल विनोद कुमार राठौर की अहम भूमिका रही है।
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