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प्राइवेट स्कूलों के अकाउंट्स ऑडिट की मांग पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, मनमानी फीस पर लगेगी रोक

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दिल्ली हाई कोर्ट ने निजी स्कूलों के खातों के नियमित ऑडिट की मांग वाली जनहित याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। फाइल फोटो



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों के अकाउंट्स के रेगुलर ऑडिट की मांग वाली एक जनहित याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया और छह हफ्ते के अंदर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

NGO जस्टिस फॉर ऑल ने याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि अधिकारी दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट के तहत मान्यता प्राप्त प्राइवेट गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के अकाउंट्स का रेगुलर ऑडिट करने के कानूनी आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं।

याचिका में कहा गया है कि अधिकारियों के कामों में फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी की कमी है और इससे प्राइवेट स्कूलों को बड़े पैमाने पर शिक्षा का कमर्शियलाइजेशन करने और बहुत ज़्यादा और मनमानी फीस वसूलकर फायदा उठाने की इजाजत मिल गई है।

याचिका में कहा गया है कि अकाउंट्स का ऑडिट करना ही यह पक्का करने का एकमात्र तरीका है कि स्टूडेंट्स से इकट्ठा किया गया पैसा स्कूल की बेहतरी के लिए इस्तेमाल हो रहा है और पर्सनल फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

याचिका में कहा गया है कि 1,624 से ज्यादा प्राइवेट गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों का इंस्पेक्शन करने के बावजूद, कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) उनके अकाउंट्स का एक भी ऑडिट करने में नाकाम रहा है, जिससे इंस्पेक्शन की पूरी कोशिश बेकार हो गई है।

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