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भागलपुर में हत्या-दहेज के दर्जनों केस 20-25 साल से अटके, गवाही देने कोर्ट नहीं आ रहे पुलिस जांचकर्ता-डॉक्टर

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कौशल किशोर मिश्र, भागलपुर। पटना उच्च न्यायालय लंबे समय की पेंडेंसी खत्म कर केसों के रिकार्ड को कम करने की रणनीति पर पुराने केसों की सुनवाई डे-टू-डे करा रही है। इधर पटना उच्च न्यायालय की पेंडेंसी खत्म करने की कवायद में कुछ पुलिस पदाधिकारी पलीता लगाने पर तुले हैं।

व्यवहार न्यायालय भागलपुर में भी हत्या के तीन दर्जन से अधिक ऐसे केस हैं जो निर्णय के मुकाम तक मात्र अनुसंधानकर्ता और चिकित्सकों की गवाही बगैर अटके पड़े हैं। इनमें तो कई केस 20 साल से अनुसंधानकर्ता पुलिस पदाधिकारी की गवाही बगैर अटके पड़े हैं।

कई ऐसे केस भी हैं जिनमें न्यायाधीश लगातार लंबे समय से नहीं आने की स्थिति में पहले जमानती फिर गैर जमानती यानी गिरफ्तारी वारंट जारी कर रखा है। लंबित इन केसों में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने एसपी-एसएसपी के वेतन रोकने तक की चेतावनी दे चुके हैं लेकिन अबतक गवाहों को पुलिस उपस्थित कराने में सफल नहीं हो सकी है लेकिन अबतक उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया जा सका है।

नतीजा लंबे समय से केस में फैसला अटका पड़ा हुआ है। अपर लोक अभियोजक राजेश कुमार सिंह की माने तो कई ऐसे केस हैं जिनमें लंबे समय से अनुसंधानकर्ता नहीं आ रहे हैं। 25 साल पूर्व हुए सबौर-लोदीपुर में हत्या के केस में तत्कालीन थानाध्यक्ष मुहम्मद शमीम और चिकित्सक डाॅ. अरुण कुमार सिंह के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट भी जारी है लेकिन उनकी गवाही नहीं हो सकी है।

ऐसी स्थिति हत्या के कई केसों में है। नतीजा संगीन मामलों से जुड़े केस कमजोर स्थिति में आ पहुंचा है। जिसका लाभ आरोपित पक्ष को मिलने की संभावना है। जानलेवा हमला, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, दहेज हत्या, अपहरण, लूट आदि के कई केसों में भी ऐसी ही स्थिति है।
1. केस स्टडी

25 साल पूर्व तत्कालीन सबौर थानाक्षेत्र के लोदीपुर कुरुडीह गांव निवासी मोजिबुरहमान पर 25 हजार रुपये बतौर रंगदारी नहीं देने पर 23 जून 2000 को जानलेवा हमला किया गया था। उसे तब उसके भाई समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया था जहां उपचार के दौरान एक जुलाई 2000 को मृत्यु हो गई थी।

इस केस में तत्कालीन थानाध्यक्ष मुहम्मद शमीम जो वर्तमान में पटना में हैं। वर्ष 2011 में विशेष शाखा निगरानी में तैनात थे। उनकी पटना में मौजूदगी बाद भी अबतक गवाही नहीं हो पाई है। इनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट निर्गत है। इसी केस में पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डाॅ. अरुण कुमार सिंह भी गवाही नहीं दे सके हैं। इनके विरुद्ध भी गैर जमानती वारंट निर्गत है। मामले में उच्च न्यायालय के निर्देश पर डे-टू-डे सुनवाई का निर्देश है।
2. केस स्टडी

25 सितंबर 2022 को हबीबपुर थानाक्षेत्र के करोड़ी बाजार के समीप कपड़ा फेरीवाले मुहम्मद सन्नी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या को लेकर तब स्थानीय लोगों में इस कदर आक्रोश था कि हत्या के आरोपित मुहम्मद दिलशाद उर्फ डीजे को दबोच कर बेरहमी से पिटाई की थी। पुलिस टीम के पहुंच जाने पर तब किसी तरह जान बची थी।

उस केस में अनुसंधानकर्ता इंस्पेक्टर कृपा सागर की अभी तक गवाही नहीं हो सकी है। उनकी गवाही मात्र से केस मुकाम तक पहुंचने को अटका पड़ा है। उनकी तैनाती छपरा जिले में बताई गई है। उन्हें भी अविलंब उपस्थित कराने का भागलपुर एसएसपी के माध्यम से छपरा एसपी को निर्देश दिया गया है।
3. केस स्टडी

कोतवाली थानाक्षेत्र के सत्रवाद केस संख्या 765-17 में खलीफाबाग गली में दहेज हत्या के केस में अनुसंधानकर्ता और सूचक की गवाही नहीं हो सकी है। इस मामले में भी लगातार कई तिथियों में गवाही को उपस्थित नहीं होने पर अनुसंधानकर्ता और सूचक के विरुद्ध न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है।
4. केस स्टडी

शाहकुंड-सजौर थानाक्षेत्र में ऑनर किलिंग के सत्रवाद केस संख्या 162-17 में केस अनुसंधानकर्ता की गवाही नहीं होने के कारण अटका पड़ा है।
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