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ट्रेन ही नहीं प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सुविधाओं पर भी रेलवे बोर्ड की नजर, अब साल में दो बार होगा ऑडिट

deltin33 3 hour(s) ago views 888
  

Railway Board Inspection: किसी कारणवश ट्रेन लेट होने के बाद प्लेटाफार्म पर उपलब्ध सुविधाओं की शिकायत मिलने लगती है। फाइल फोटो



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Railway Board Inspection: अब रेलवे बोर्ड की नजर सिर्फ ट्रेनों के संचालन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की भी गहन समीक्षा की जाएगी।

भारतीय रेल ने यात्री सुविधाओं को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से वर्ष में दो बार लेखा-परीक्षण कराने का निर्णय लिया है। यह ऑडिट श्रेणी-1 और श्रेणी-2 के स्टेशनों पर किया जाएगा।

इस संबंध में रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (संरक्षा) बीएम त्रिपाठी ने पूर्व मध्य रेलवे समेत देशभर के सभी महाप्रबंधकों को पत्र जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि कुछ रेलवे जोन साल में दो बार लेखा परीक्षण कराने में असफल रहे हैं, जिसे रेलवे बोर्ड ने गंभीरता से लिया है।

निर्देश दिया गया है कि संशोधित कार्यक्रम के अनुसार निरीक्षण से पहले पिछली लेखा-परीक्षण रिपोर्ट और लंबित बिंदुओं पर की गई कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट अनिवार्य रूप से प्रस्तुत की जाए।

अब लेखा परीक्षण दो चरणों में होगा—पहला जनवरी से जून और दूसरा जुलाई से दिसंबर तक। पूर्व मध्य रेलवे में यह प्रक्रिया मई-जून और नवंबर-दिसंबर के दौरान कराई जाएगी।

यात्री सुविधा और सुरक्षा से जुड़े इस लेखा-परीक्षण की जिम्मेदारी कोलकाता मेट्रो को सौंपी गई है।
सभी विभागों के अधिकारी रहेंगे शामिल

लेखा परीक्षण दल में पीसीएसओ को संयोजक बनाया गया है। उनके साथ परिचालन, यांत्रिक, सिविल, विद्युत और सिग्नल विभाग के वरीय अधिकारी शामिल रहेंगे।

जांच के दौरान प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध यात्री सुविधाएं जैसे शौचालय, पेयजल, बैठने की व्यवस्था, पंखे, पर्याप्त रोशनी, सीसीटीवी निगरानी और स्टालों की स्थिति की बारीकी से समीक्षा की जाएगी।

जहां भी किसी प्रकार की कमी पाई जाएगी, वहां संबंधित विभाग से अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी ली जाएगी। इसके अलावा जांच दल यात्रियों से सीधे फीडबैक लेकर उसे रिपोर्ट का हिस्सा बनाएगा।

साथ ही ट्रेनों के समयबद्ध परिचालन, स्टेशनों से गुजरने वाली ट्रेनों की श्रेणी और यात्रियों को दी जा रही सुविधाओं का समग्र आकलन कर रिपोर्ट संबंधित जोन और रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी।

रेलवे बोर्ड के इस फैसले से स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं में सुधार और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
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