इसमें प्रतीकात्मकत तस्वीर लगाई गई है।
जागरण संवाददाता, बेतिया । किसानों की आय बढ़ाने एवं मृदा की सेहत सुधारने को लेकर केंद्र सरकार की ओर से एक बड़ा कदम उठाई जा रही है। नए वित्तीय वर्ष में पहली बार सल्फर युक्त यूरिया उपलब्ध कराई जाएगी।
कृषि विभाग का दावा है कि इस नए उर्वरक के उपयोग से फसलों की पैदावार में वृद्धि होगी और भूमि की उर्वरा शक्ति भी सशक्त होगी। जानकारों के अनुसार पिछले कुछ वर्षो से रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग के कारण मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है।
पारंपरिक यूरिया में जहां 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होता है, वहीं सल्फर की मात्रा शून्य होती है। इसके कारण मृदा में सल्फर की कमी हो रही है। इससे उत्पादन क्षमता पर असर पड़ रहा है।
इसी समस्या के समाधान के लिए सरकार ने सल्फर युक्त यूरिया को बाजार में उतारने का निर्णय लिया है। नई सल्फर युक्त यूरिया में 37 प्रतिशत नाइट्रोजन और 17 प्रतिशत सल्फर होगा।
तैलीय फसलों के उत्पादन में सल्फर की है महत्वपूर्ण भूमिका
राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मृदा सूक्ष्मजीव, आधार विज्ञान एवं मानविकी के सहायक प्राध्यापक डा. अजित कुमार के अनुसार सल्फर पौधों की वृद्धि, दानों की गुणवत्ता और दानों की गुणवत्ता और तैलीय फसलों के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इससे फसलों में हरियाली बेहतर होगी और उत्पादन में बढ़ोत्तरी की संभावना बढ़ेगी। इसके साथ ही मिट्टी की संरचना में सुधार होगा और लंबे समय तक भूमि की उत्पादकता बनी रहेगी।
सस्ती दर पर मिलेगी सल्फर यूरिया
सल्फर यूरिया बाजार में 254 प्रति बोरी किसानों को मिलेगी। जबकि यूरिया के मूल्य बाजार में 266 रुपये प्रति बोरी है। सरकार का उद्देश्य किसानों के आय को हर हाल में बढ़ाना है। इसके लिए लगातार नई-नई योजनाएं लागू की जा रही हैं।
सल्फर युक्त यूरिया इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। उर्वरक बनाने वाली सभी प्रमुख कंपनियों को इसका उत्पादन करने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि किसानाेें को इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
यदि किसान संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाते हैं,तो उत्पादन लागत कम होगी और उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी। इससे किसानों को अधिक लाभ मिलेगा और मिट्टी बंजर होने की प्रक्रिया पर भी रोक लगेगी।
शरफराज असगर,जिला कृषि पदाधिकारी, पश्चिम चंपारण |
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