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इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के छतौना पंचायत स्थित भूसारी ढाब में गत सितंबर में हुई नीतीश हत्याकांड की गुत्थी छह माह बाद भी नहीं सुलझ पाई है। पुलिस अब तक किसी ठोस सुराग तक नहीं पहुंच सकी है।
मानवीय और तकनीकी दोनों स्तरों पर अनुसंधान किए जाने के बावजूद सफलता हाथ नहीं लगी है। घटना के बाद पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के विरुद्ध हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।
अब तक दो दर्जन से अधिक संदिग्धों से पूछताछ की जा चुकी है। कई लोगों से कड़ाई से गहन पूछताछ भी की गई, लेकिन घटना से जुड़ी कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई।
उल्लेखनीय है कि गत 12 सितंबर को नीतीश कुमार का शव भूसारी ढाब के पास से बरामद हुआ था। शव के गले पर जख्म के निशान थे और उसे मछली पकड़ने वाली जाल से ढंककर छिपाया गया था।
तकनीकी जांच भी बेनतीजा
पुलिस ने घटनास्थल पर टावर डंपिंग सहित अन्य तकनीकी अनुसंधान का सहारा लिया, किंतु इससे भी कोई महत्वपूर्ण सुराग नहीं मिला। छह माह से पुलिस लगातार इस हत्याकांड के राजफाश के प्रयास में जुटी है, लेकिन शातिर अपराधी तक पहुंचना अब भी चुनौती बना हुआ है। पुलिस के मुखबिर तंत्र से भी अब तक कोई ठोस जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी है।
आखिर किसने और क्यों की हत्या ?
यह सवाल अब भी अनुत्तरित है कि नीतीश की हत्या किसने और किस कारण से की। फिलहाल यह मामला पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि पुलिस का दावा है कि वह पूरी गंभीरता से मामले की जांच में जुटी है।
परिजनों को अब भी न्याय की उम्मीद
इधर, पीड़ित परिजन पुलिस प्रशासन पर भरोसा जताते हुए न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि नीतीश घर से बिना कुछ बताए निकला था। उन्हें यह भी समझ नहीं आ रहा कि वह गंडक नदी किनारे कैसे पहुंच गया। मुफस्सिल थानाध्यक्ष अजित प्रसाद सिंह ने बताया कि मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है और जल्द ही मामले के खुलासा का प्रयास किया जा रहा है। |
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