search

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 2018 से पहले के भू-अधिग्रहण मामलों में ब्याज सहित मुआवजा नहीं

deltin33 1 hour(s) ago views 290
  

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई। (फाइल)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मौखिक टिप्पणी में कहा कि एनएचएआइ एक्ट के तहत जिन किसानों की जमीन अधिग्रहीत की गई थी, उन्हें ब्याज सहित मुआवजा देने के लिए 2018 से पहले के भू-अधिग्रहण मामले फिर से नहीं खोले जा सकते।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की विशेष पीठ ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की एक याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई शुरू करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में कहा था कि एनएचएआइ एक्ट के तहत जिन किसानों की जमीन अधिग्रहीत की गई थी, उन्हें ब्याज के साथ मुआवजा देने का फैसला पिछली तिथि से लागू होगा। एनएचएआइ की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 2019 के फैसले से बहुत बड़ा वित्तीय बोझ (लगभग 32,000 करोड़ रुपये) पड़ा है और इसे केवल आगे की तिथि से ही लागू होना चाहिए।

पीठ ने पहले इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि ऐसे लाभ देने से इनकार करना संविधान के अनुच्छेद-14 (बराबरी का अधिकार) का उल्लंघन है। मेहता ने कहा, \“\“शायद अदालत को लगा था कि यह धनराशि 100 करोड़ रुपये थी\“\“ और कहा कि एक अन्य फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि निपटाए गए किसी भी मामले को फिर से नहीं खोला जाएगा।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, \“\“कट-ऑफ तिथि 2008 की लगती है, बशर्ते उस समय दावे अस्तित्व में रहे हों। 2018 से पहले के मामले फिर से नहीं खोले जा सकते। 2008 में जो मामले लंबित थे, वे जारी रहेंगे। अगर 2020 की शुरुआत में किसी ने यह कहते हुए याचिका दायर की हो कि वे 2008 के आधार पर समानता के हकदार हैं, तो हम मुआवजे के लिए हां कह सकते हैं, लेकिन ब्याज के लिए नहीं, जैसा भू-अधिग्रहण मामलों में होता है।\“\“

पीठ ने संक्षिप्त दलीलें सुनीं और पक्षकारों से लिखित दलीलें दाखिल करने को कहते हुए पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई दो हफ्ते बाद के लिए सूचीबद्ध कर दी।

पिछले वर्ष चार नवंबर को प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ एनएचएआइ की उस याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई के लिए मान गई थी, जिसमें उसके फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई थी। पीठ ने पुनर्विचार याचिका पर नोटिस जारी किया था और मामले को 11 नवंबर, 2025 को खुली अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था। सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को बताया था कि इस मामले का असर लगभग 32,000 करोड़ रुपये होगा, न कि 100 करोड़ रुपये, जैसा कि याचिका में पहले कहा गया था।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4710K

Credits

administrator

Credits
475732